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संकट में सरकार: कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, जगह-जगह शुरू हुए धरना प्रदर्शन

जैसे—जैसे विधानसभा चुनाव की तिथि नजदीक आ रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन तेज हो रहा है इससे सरकार का संकट भी बढ़ता जा रहा है।

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भोपाल। प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार बरसों से नियमित करने और वेतन बढ़ाने के आश्वासन देती आ रही है, लेकिन अब कार्यकर्ता के वादों को मानने को तैयार नहीं हैं। अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं इसे देखते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। प्रदेशभर में सुलग रही आंदोलन आग आग अब भोपाल तक आ पहुंची है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने खुली चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो उसे चुनाव में इसे दुष्परिणाम भुगतना पड़ सकते हैं। कार्यकर्ताओं के आंदोलन से सरकार अब चारों ओर घिर गई है इससे सरकार पर संकट भी बढ़ गया है।

जगह-जगह शुरू हुए धरना प्रदर्शन
अपनी मांगों को लेकर उग्र हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को भोपाल में जमकर हंगामा किया। यह चिंगारी कई सालों से सुलग रही थी, लेकिन अब कार्यकर्ताओं को लगने लगा कि अभी नहीं तो कभी नहीं। इसके चलते अब तक जिला और तहसील मुख्यालयों पर हो रहे आंदोलन का असर नहीं होने के बाद भड़के आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने राजधानी की ओर रुख किया है। इससे पहले भी आंदोलनकारियों ने भोपाल होशंगाबाद रोड पर लंबा जाम लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे, अब अगर सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया तो उसके लिए यह आंदोलन खतरे की घंटी साबित हो सकता है।

कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रदेशभर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अपने संगठन बनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित सभी संभाग और जिला मुख्यालयों पर पिछले कई सालों से आंदोलन चल रहा है। पिछले दिनों छिंदवाड़ा में बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संगठन के बैनर तले हड़ताल कर प्रभावी प्रदर्शन किया गया था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपना मानदेय बढ़ाने और नियमित करने की मांग को लेकर लगातार मुखर हैं।

ठप्प होने लगा आंगनवाड़ी का संचालन
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लंबित मांगों को को लेकर कई दिनों से हड़ताल पर हैं। इस आंदोलन से प्रदेशभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर रहने से सैकड़ों आंगनवाडिय़ों के ताले नहीं खुले। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सिर्फ दिलासा दिया है, लेकिन अब तक एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार अगर ठोस कदम नहीं उठाती है आंगनवाड़ी कार्यकर्ता यह काम करेंगे। इस बार लड़ाई आर-पार की है। हमारी मांग पूरी नहीं होती तब तक निरंतर यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

संकट में सरकार, चुनाव पर पड़ सकता है असर
अतिथि शिक्षकों के बाद में सबसे बड़ी संख्या आंनगवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की है। चूंकी इन पदों पर केवल महिलाएं ही काम करती हैं इसलिए इनका अपने परिवारों पर भी गहरा असर होता है। अब तक माना जा रहा था कि सरकार महिलाओं को लेकर चला रही योजनाओं के दम पर प्रदेश में फिर सरकार बना लेगी लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सरकार को संकट में डाल सकती है। यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं अब अकेली नहीं है बल्कि महिलाओं से जुड़े कई ओर संगठन भी इनके कांधे से कांधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

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