
दो लाख में टाइगर तो एक लाख में भालू को ले सकेंगे गोद
भोपाल. अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम... यह पंक्तियां तो अब भी 100 फीसदी सही हैं, लेकिन अजगर काम करे या नहीं, अजगर को गोद जरूर लिया जा सकता है। यह मौका वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और चिडिय़ाघर वन्य जीव प्रेमियों और आम नागरिकों को दे रहा है। लगभग एक दशक पुरानी योजना में घटते प्रतिसाद के बाद बड़े स्तर पर इसका प्रचार शुरू करते हुए वन विहार ने एक बार फिर वन्य प्राण्यिों की सूची और नाम जारी किए।
वन विहार में वन्य प्राणियों को गोद लेने के लिए पर्यटक शुल्क चुका, मासिक, त्रैमासिक, अद्र्ध वार्षिक या वार्षिक आधार पर वन्य प्राणियों को गोद ले सकते हैं। इसके तहत सिंह और बाघ को दो लाख रुपए वार्षिक या 17 हजार रुपए मासिक व्यय पर गोद लिया जा सकता है। तेंदुआ और भालू को एक लाख रुपए वार्षिक या 9000 रुपए महीने पर तो मगर को चार तो घडिय़ाल को पांच हजार रुपए मासिक पर गोद लिया जा सकता है। सबसे कम व्यय अजगर को गोद लेने पर है जिसे 800 रुपए मासिक या आठ हजार रुपए वार्षिक व्यय पर गोद लिया जा सकता है।
गोद लेने वाले का होगा नाम
गोद लेने वाले की नाम की पट्टिका वन्य प्राणी के बाड़े के समक्ष एवं दोनों प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शन के लिए लगाई जाएगी, वहीं उन्हें दान राशि के 10 फीसदी के बराबर निशुल्क पास दिए जाएंगे। इस राशि पर आयकर छूट भी मिलती है।
78 को लिया जा चुका है
गौरतलब है कि एक दशक से अधिक से चल रही योजना के तहत पिछले 12 सालों में अब तक 78 वन्य प्राणियों को गोद लिया जा चुका है। यह संख्या धीरे-धीरे घट रही है और यह संख्या घटते हुए इस साल केवल तीन वन्य प्राणियों को ही गोद लिया जा चुका है। घटते रूझान के बाद वन विहार ने एक अक्टूबर से अभियान शुरू करने जा रहा है। पहले लोग अपने या प्रियजनों के जन्मदिन शादी की वर्षगांठ आदि अवसरों को यादगार बनाने के लिए वन्य प्राणियों को गोद लिया करते थे। लोगों में इस योजना की जानकारी बढ़े इसलिए अब नए सिरे से व्यापक प्रचार प्रसार की योजना बना रहे हैं। इसे अभियान के तौर पर चलाया जाएगा।
एच सी गुप्ता, डायरेक्टर वन विहार
Published on:
18 Sept 2021 01:53 am
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