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यूरोप, यूएसए, कोरिया और चीन के प्रोजेक्ट पर एनिमेशन में बड़ा काम करके दिखा रहे युवा

यूरोप, यूएसए, कोरिया, चीन के भी विभिन्न प्रोजेक्ट पर काम, हैदराबाद, दुबई में काम कर रहे युवा लौट आए अपने प्रदेश

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यूरोप, यूएसए, कोरिया और चीन के प्रोजेक्ट पर एनिमेशन में बड़ा काम करके दिखा रहे युवा

भोपाल. संसाधनों से अधिक प्रतिभा पलायन प्रॉपर गाइडेंस और सपोर्ट न मिलने के कारण होता है। वैसे प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्हें पंख मिले तो उनकी उड़ान आकाश तक पहुंची। एनिमेशन के क्षेत्र में सीहोर के रहने वाले कुमार संभव ने स्वयं तो इंटरनेशनल मार्केट में नाम स्थापित किया ही, प्रदेश से बाहर काम कर रहे दो दर्जन से अधिक युवाओं को वापस बुला लिया। ये युवा अब यहां आकर खुश हैं। उन्हें बाहर जितना पैकेज तो मिल ही रहा है, साथ में अपने पेरेन्ट्स व रिश्तेदारों के पास भी हैं।

कुमार संभव ने बताया कि मुंबई में कॉमर्स की डिग्री के बाद मुंबई के प्रतिष्ठित एलएस रहेजा कॉलेज से फाइन आट्र्स में भी पढ़ाई की। इसके बाद मुंबई में काम शुरू किया। कुछ समय बाद दादर, मुंबई में कलर बैग्स के नाम से एनिमेशन एकेडमी खोली।

वर्ष २००८ में पारिवारिक कारणों से भोपाल आए। अपने सिखाए युवाओं के साथ मिलकर वर्ष २०१३ में ऑस्ट्रेलिया व कोरिया के प्रोजेक्ट किए। उन्हें सही राह नहीं मिल पा रही थी। वर्ष २०१६ में उन्हें इंवेस्टमेंट गुरु व मेंटर प्रदीप करम्बेलकर ने सहयोग किया और अगले वर्ष वीएएसपीएल इन्क्यूबेशन सेंटर में एनिमेशन यूनिट का काम संचालित किया।

काम के गति पकड़ते ही उन्होंने दुबई, हैदराबाद आदि स्थानों पर काम कर रहे प्रदेश के युवाओं को यहां बुलाकर अवसर दिया। रविवार को आने वाले बच्चों के एनिमेशन मोटू-पतलू और रुद्रा का का काम भी यहीं किया जा रहा है। यूरोप, यूएसए, कोरिया, चीन के कई एनिमेशन फिल्म यहां बन रही हैं। यूरोपियन क्लांइट के लिए ३०० से अधिक गानों की ७०० मिनट ड्यूरेशन की फिल्म बन चुकी है।
ये बोले युवा

एनआइटी अहमदाबाद से आए प्रशांत चौरसिया का कहना है कि अपने प्रदेश में काम करने का उत्साह ही अलग है। उनका परिवार सीहोर में है। डीक्यू हैदराबाद से आईं स्पेशल इफेक्ट्स आर्टिस्ट तनु शर्मा कहती हैं कि अपना घर, अपना प्रदेश कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

इसके साथ प्रदीप वर्मा, टेक्निकल डायरेक्टर राज कौशल, अंकित भाटी, योगेश सेन, जयदीप रायजादा, अभिनव चौरसिया, अमित उपाध्याय, दीपेश यादव, सुजीत मारकस, योगेश सेन, ऋत्विक नागर, वैभव धुर्वे, जोसेफ पन्ना, विवेक ताम्रकर आदि भोपाल में काम करके इतने खुश हैं कि विदेश के ऑफर भी मना कर रहे हैं।

फलक पर पहुंचने ये युवा भी बेताव
- योगेश साहू, टी-फे्रन्ड ब्रांड- २० युवाओं को रोजगार।
- विवेक जूड, एचआर कंपनी, यूएनडीपी में कंसल्टेंट, छह को रोजगार।
- अंकित, साउंड थेरेपी पर शोधकार्य, दो युवाओं को रोजगार।
- मिलिंद, कैपिटल मैनेजमेंट कंपनी, सात युवाओं को रोजगार।
- मेरिटोरियस युवा सीए अंशुल जैन युवा उद्यमियों को देते कर संबंधी सलाह।
- युवाओं ने न्यूज एंड व्यूज ३६० डॉट कॉम ऑनलाइन चैनल

वीएएसपीएल में कर रहे ग्रोथ

प्राइड ऑफ एमपी के खिताब से अलंकृत प्रदीप करम्बेलकर इन युवा उद्यमियों के लिए इन्वेस्टमेंट गुरु, मेंटर व सीड कैपिटल फंडर हैं। उन्होंने वीएएसपीएल इन्क्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ नवम्बर २०१७ में किया था।

यह युवाओं को नव उद्यमी बनाने में मदद करने को मप्र शासन का अधिकृत केन्द्र है। यहां स्टार्ट अप वाले नव उद्यमियों गाइडेंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, वेल इक्प्डि ऑफिस, ट्रेनिंग के साथ सीड कैपिटल भी उपलब्ध कराया जाता है। युवाओं को बिजनेस शुरू करने और चलाने के लिए फीड कैपिटल प्रदान करने वाला यह प्रदेश का पहला और एकमात्र इन्क्यूबेशन सेंटर है।

यहां नव उद्यमियों को दो से तीन वर्ष तक सभी तरह की सपोर्ट दी जाएगी। पिछली वर्ष ६ नव उद्यमी थे, इस वर्ष बढ़कर ११ हो गए हैं। तीन युवा उद्यमियों का बिजनेस तो सालभर में ही एक करोड़ के टर्नओवर तक जा पहुंचा है। इन नव उद्यमियों ने लगभग ६५ युवाओं को रोजगार दे रखा है। ये रोजगार पाने वाले युवाओं को भी इस तरह तैयार किया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में स्वयं भी उद्यमी बन सकते हैं।