
Ankylosing Spondylitis
जागरूकता के अभाव में ज्यादातर लोग इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करते हैं। जिससे आगे चलकर व्यक्ति का चलना फिरना तक मुश्किल होता है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर की करीब एक फीसदी आबादी इससे प्रभावित है। यही नहीं इसके हर चार मरीजों में से एक पुरुष है।
क्या है एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (ankylosing spondylitis)
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (ankylosing spondylitis) एक ऑटोइम्यून बीमारी है। यह ब्लड में एचएलए बी27 के पॉजिटिव होने से होती है। इसमें रीढ़ की हड्डी समय के साथ कड़क होती जाती है। साथ ही स्पाइन में दर्द के साथ सूजन तक आ जाती है। इसमें रीढ़ का लचीलापन कम हो जाता है और चलने फिरने में कठिनाई होने लगती है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह शरीर के अलग अलग हिस्सों में सूजन से लेकर मूवमेंट को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है।
इन जांचों से बीमारी की पहचान
● सीटी स्कैन
● एमआरआइ
● एचएलए बी 27
● एक्स रे
ये हैं लक्षण
● गर्दन, पसली, कमर दर्द व अकड़न
● कंधे, जांघ व जोड़ों में दर्द
● रीढ़ का आगे की तरफ झुकना
● सुबह तेज दर्द से नींद खुलना
ये हैं बचाव के तरीके
● फिजिकल एक्सरसाइज व मोबिलिटी पर ध्यान दें
● सही दिनचर्या बनाएं
● स्क्रीन टाइम कम करें
● भरे पेट बिस्तर पर न जाएं
● स्वीमिंग इसके बचाव व उपचार दोनों में कारगर।
इस बारे में डॉ. अरुण तिवारी, रुमेटोलॉजिस्ट का कहना है कि यह रीढ़ की हड्डी के बीच के छोटे-छोटे जोड़ का अर्थराइटिस होता है। जितना जल्दी इसकी पहचान होगी शरीर को उतना कम नुकसान होगा। रोजाना दो से तीन मरीज इसके चलते ओपीडी में आते हैं।
Published on:
23 Feb 2024 02:06 pm
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