
भोपाल. कोरोना काल के बाद राजधानी भोपाल में हेल्थ सप्लीमेंट या न्यूट्रास्यूटिकल्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। पिछले पांच सालों में इससे जुड़े कुछ प्रोडॅक्ट में तो 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से मार्केट में कम गुणवत्ता के प्रोडक्ट आ गए हैं। जिनका सेवन से युवाओं में कई शारीरिक व्याधियां बढ़ी हैं। इसलिए खाद्य नियामक एफएसएसएआइ की जगह इसे औषधि नियामक सीडीएससीओ (केन्द्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन) के दायरे में लाने की कवायद चल रही है। इस संबंध में एक केंद्रीय समिति भी गठित की जा चुकी है।
क्यों पड़ी जरूरत
उपभोक्ताओं की सुरक्षा को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे नियंत्रित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वर्तमान में एफएसएसएआइ न्यूट्रास्यूटिकल्स के उपयोग को नियंत्रित करता है। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक हेल्थ सप्लीमेंट का सेवन करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
क्या हैं न्यूट्रास्यूटिकल्स
न्यूट्रास्यूटिकल्स एक तहत से खाने की ऐसी चीज है जो पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक देने के साथ बीमारी की रोकथाम और उपचार तक में मदद करती है।
अभी यह व्यवस्था
खाद्य सुरक्षा और भारतीय मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) खाद्य सुरक्षा और मानक (स्वास्थ्य पूरक, पौष्टिक-औषधीय पदार्थ, विशेष आहार उपयोग के लिए भोजन, विशेष चिकित्सा प्रयोजन के लिए भोजन और प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक खाद्य) विनियम, 2022 के तहत स्वास्थ्य पूरक और पौष्टिक-औषधीय पदार्थ के उपयोग को नियंत्रित करता है।
क्या होता है नुकसान
सप्लीमेंट के अनियंत्रित इस्तेमाल के कारण, लोग एक ही समय पर दवाओं के साथ सप्लीमेंट का भी सेवन करते हैं। यह एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया कर सकते हैं। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सेहत के लिहाज से केंद्र सरकार का यह बेहतर फैसला है। इससे फूड सप्लीमेंट्स प्रोडक्ट्स की सही जांच व गुणवत्ता में सुधार आएगा। वर्तमान में कई कंपनियोंं के इस तरह के प्रोडक्ट्स के लिए फोन आते हैं, जब उनसे प्रोडक्ट सर्टिफेक्ट मांगा जाता है तो फोन कट जाता है। इस नियम से गलत प्रोडक्ट्स बेचने वालों पर भी रोक लगेगी।
अभिशेष सिंह बघेल, फिटनेस कोच
मार्केट में मिलने वाले सभी सप्लीमेंट सेफ हों यह संभव नहीं है। यदि इन पर अंकुश लगे तो यह उपभोक्ताओं की सेहत के लिए बेहतर होगा। युवाओं में जिम का क्रेज बढ़ा है। यह अच्छा है, लेकिन इसके चलते वे अन्य खतरे की चपेट में ना आ जाएं। इसके लिए सरकारी कदम उठाना अच्छी पहल है।
डॉ.पंकज शुक्ला, पूर्व संचालक, एनएचएम
इस तरह बढ़ रहा बाजार
न्यूट्रास्यूटिकल बाजार 2025 के अंत तक 18 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2020 में यह आंकड़ा चार अरब डॉलर का था।
Published on:
20 Feb 2024 12:44 am
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