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Women Leaders : इस बार चुनावी मैदान में नहीं दिखेंगे BJP की इन दिग्गज महिला नेताओं के चेहरे

Women Leaders In MP : मप्र की राजनीति में कभी दमदार हैसियत रखने वाली कुछ महिला नेताओं ने इस बार चुनावी राजनीति से नजरें फेर ली हैं। जल्द ही शुरू होने वाले चुनावी समर में उनकी सक्रिय मौजूदगी न होना उनके प्रशंसकों को खलेगी।

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Women Leaders In MP : मप्र की राजनीति में कभी दमदार हैसियत रखने वाली कुछ महिला नेताओं ने इस बार चुनावी राजनीति से नजरें फेर ली हैं। जल्द ही शुरू होने वाले चुनावी समर में उनकी सक्रिय मौजूदगी न होना उनके प्रशंसकों को खलेगी। ऐसी महिला नेताओं में भाजपा से उमा भारती, यशोधरा राजे सिंधिया, रंजना बघेल और अर्चना चिटनिस शामिल हैं। मप्र की पहली मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती घोषणा कर चुकी हैं कि वे अब न तो एमपी और न ही यूपी से चुनाव लड़ेंगी, वे अब कोई और ठिकाना तलाशेंगी, वहीं यशोधरा राजे ने हाल ही में बीमारी के कारण चुनाव लडऩे से इनकार कर दिया है। रंजना बघेल और अर्चना चिटनिस को 2018 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। अब इसकी उम्मीद कम है कि पार्टी इन दोनों नेताओं को दोबारा टिकट देगी। जानें इनका राजनीतिक करियर...

उमा भारती का राजनीतिक सफर
उमा भारती ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1984 में लड़ा था, लेकिन वे हार गई थीं। 1989 में खजुराहो से उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 1991, 1996, 1998 में इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। 1999 में वे भोपाल सीट से सांसद निर्वाचित हुईं। इसके साथ ही वाजपेयी सरकार में उन्होंने मानव संसाधन विकास, पर्यटन, युवा मामले एवं खेल और अंत में कोयला और खदान जैसे कई राज्य स्तरीय और कैबिनेट स्तर के पदों का कार्यभार संभाला।

प्रदेश से कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने के लिए BJP ने तत्कालीन कोयला मंत्री उमा भारती को मध्य प्रदेश BJP का अध्यक्ष बनाया. उमा ने तुरंत केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रदेश में आकर BJP की ऐसी जड़ें जमाईं कि दिग्विजय सिंह की सत्ता का पत्ता साफ हो गया। प्रदेश में BJP की सरकार बनते ही उमा भारती को एमपी का सीएम बनाया गया। उमा भारती मध्य प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री बनीं। उमा भारती को CM पद पर 8 महीने ही हुए थे कि इस बीच साल 1994 के एक मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ। ऐसे में CM की कुर्सी पर बैठने के 8 महीने बाद ही उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उमा भारती ने अपने पद से इस्तीफा देने का बाद BJP भी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाई। हालांकि, साल 2011 में एक बार फिर उन्होंने BJP में वापसी कर ली।

यशोधरा राजे सिंधिया

लंदन में पैदा हुईं, यशोधरा राजे सिंधिया ने 1998 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्या के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। वह जिवाजीराव सिंधिया और स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटी हैं। 1994 में वह भारत वापस आ गईं और औपचारिक रूप से 1998 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सदस्य के रूप में चुनाव लड़ा और राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल हो गईं।

2013 में वे वाणिज्य, उद्योग तथा रोजगार मंत्री और मध्यप्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (भोपाल) की अध्यक्षा बनी। 2013 में उन्होंने शिवपुरी से विधानसभा चुनाव जीता और कांग्रेस के बिरेंद्र रघुवंशी को हराया। उन्होंने 19 दिसंबर 2013 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। 2010 में वह अनुमान पर समिति की सदस्या बनीं।2009 में राजे को ग्वालियर सीट से 15 वीं लोकसभा (दो बार) में फिर से निर्वाचित किया गया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोक सिंह को हराया। बाद में उन्हें रेलवे और महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।2007 में वे उपचुनाव में 14 वीं लोक सभा के लिए चुनी गईं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति की सदस्या रहीं। 2006-2007 से मध्य प्रदेश एसटीडीसी की अध्यक्षा बनी रहीं। वे 2005 से 2007 तक मध्य प्रदेश सरकार में पर्यटन, खेल और युवा कल्याण मंत्री रहीं। 1998 में उन्होंने सफलतापूर्वक विधानसभा चुनाव लड़ा और शिवपुरी निर्वाचन क्षेत्र से मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्या बनीं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के हरिबल्लभ शुक्ला को हराया।

रंजना बघेल

रंजना बघेल मध्य प्रदेश की एक भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिज्ञ हैं। वे मध्य प्रदेश विधान सभा की सदस्य हैं और उन्होंने राज्य की महिला और बाल कल्याण मंत्री के रूप में कार्य किया है। 2018 के चुनावों में मनावर से हार का सामना करना पड़ा।

अर्चना चिटनिस
अर्चना चिटनिस मध्य प्रदेश से BJP की राजनेता हैं। वे बुरहानपुर (विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र) का प्रतिनिधित्व करने वाली मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य रहीं और उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया है। उन्होंने महिला और बाल विकास मंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में काम किया है। 2018 के विस चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।