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लोधी की सदस्यता बहाली पर विधानसभा अध्यक्ष का इनकार

- नेता प्रतिपक्ष ने लोधी को शीतकालीन सत्र में शामिल करने का किया आग्रह, प्रजापति बोले नहीं दे सकता इजाजत

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भोपाल। भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाली के मामले में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को बैरंग लौटा दिया है। शुक्रवार को भार्गव ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर लोधी को शीतकालीन सत्र में शामिल करने का आग्रह किया, जिस पर अध्यक्ष ने साफ कहा कि मैं इसकी इजाजत नहीं दे सकता।

उन्होंने कहा कि चूंकि अब मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं इसलिए इस पर मेरे द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही कुछ हो पाएगा। उधर लोधी की सदस्यता के मामले में अब भाजपा अपना अगला कदम दिल्ली में केंद्रीय संगठन के साथ मिलकर तय करेगी।

नेता प्रतिपक्ष के साथ तकरीबन 20 मिनट चली मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि जैसे ही किसी सदस्य को सजा होती है, उसी समय उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है।

विशेष न्यायालय ने लोधी को सजा सुनाई और मैंने तो कार्यवाही को आगे बढ़ाया है। हाईकोर्ट के स्थगन के बाद अब मामला सुप्रीमकोर्ट चला गया है इसलिए सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद ही आगे कुछ होगा। उन्होंने कहा कि मैं न्याय संगत निर्णय ही लूंगा।

उधर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने एक बार फिर इस मामले में अपनी ओर से उचित निर्णय नहीं लिया है। अभी सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर कोई निर्णय ही नहीं लिया है, ऐसे में उन्हें सजा पर स्टे देखते हुए तत्काल लोधी की सदस्यता बहाल करना चाहिए।

अभी वे यह निर्णय ले सकते हैं। भार्गव ने कहा कि मैं पिछले 35 साल से इस विधानसभा का सदस्य हूं। कभी भी संवाद समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, नेता प्रतिपक्ष और सीएम गाडी के दो पहिए हैं अध्यक्ष उस गाड़ी के ड्रायवर। अगर अध्यक्ष हमें समय नहीं देंगे तो द्वंद्व की स्थिति बनेगी।

पक्षपात के आरोपों से हूं दुखी-

विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि वे भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों से अत्यंत दु:खी हैं। उन्होंने कहा कि वे एक संवैधानिक पद पर हैं। संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति तक इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष से टेलीफोन पर चर्चा हुई थी। उस दौरान क्षेत्र में कुछ कार्यक्रम थे।

जनप्रतिनिधि होने के नाते कार्यक्रमों में शामिल होना होता है, इसलिए वे भोपाल नहीं आ पाए। लेकिन जिस तरह के आरोप लगाए गए वे उचित नहीं हैं। स्पीकर ने कहा कि उनके लिए सभी विधायक समान हैं। वे कोई भी निर्णय पक्षपात से नहीं लेते। इसलिए आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी नहीं करना चाहिए जिससे गलत संदेश जाए।