14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विरोधी भी करते थे सम्मान, नेहरू भी थे प्रभावित; अटलजी ने कहा था- मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा

विरोधी भी करते थे सम्मान, पंडित नेहरू भी थे प्रभावित; अटलजी ने कहा था- मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं

3 min read
Google source verification
atal

विरोधी भी करते थे सम्मान, नेहरू भी थे प्रभावित; अटलजी ने कहा था- मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा

भोपाल. देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी की आज जयंती है। अटलजी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। इसी साल 16 अगस्त को लंबी बीमारी के बाद 93 साल की उम्र में अटलजी का निधन हो गया था। अटलजी की भारत के उन राजनेताओं में शामिल थे जिनका आदार विपक्षी दल के लोग भी करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण शैली के लोग दीवाने थे और उनकी इस शैली का विरोधी भी सम्मान करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी कवि भी थे और आज बी उनकी कविताओं को याद किया जाता है।


संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिया था भाषण
अटलजी पहले नेता थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था। 1977 में मोरारजी देसाई की अगुवाई वाली जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था। मार्च 2015 में उन्हें देश के सबसे उच्च और प्रतिष्ठित सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

पोखरण में परमाणु परीक्षण से दिखाई ताकत
अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में 1998 से 1999 तक का कार्यकाल साहसिक कदम के लिए जाना जाता है। अटलबिहारी वाजपेयी ने मई 1998 में राजस्थान के पोखरण रेंज में सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया में भारत की ताकत बता ईथी। इस परीक्षण के कारण भारत को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था लेकिन वाजपेयी के कुशल नेतृत्व में देश उन अड़चनों से पार पा गया।

नेहरू ने कहा था- एक दिन वाजपेयी बनेंगे पीएम
अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1957 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर लोकसभा सीट जीत दर्जकर संसद पहुंचे थे। बताया जाता है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में दिए अपने पहले ही भाषण से सभी का दिल जीत लिया। उनका भाषण सुनने के बाद प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था अटल बिहारी वाजपेयी एक दिन देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।

जारी किया गया है 100 रुपए का सिक्का
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में 100 रुपए का सिक्का जारी किया गया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के संसद भवन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र वाला 100 रुपए का सिक्का जारी किया था। 35 ग्राम के इस सिक्के में अटलजी के नाम के साथ उनका चित्र है। तस्वीर के नीचे अटलजी के जन्म का साल 1924 और मृत्यु का साल 2018 भी लिखा हुआ है। सिक्के के दूसरी तरफ अशोक स्तंभ का निशान है। इस सिक्के के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है। इसमें 50 फीसदी चांदी, 40 फीसदी तांबा और पांच-पांच फीसदी निकिल और जस्ता है।

मोदी और शिवराज ने किया याद
अटलजी की याद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, हम सबके प्रिय, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। वहीं, मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। आपने राष्ट्र भक्ति, जन सेवा और गरीब कल्याण के जो संस्कार हम सभी को दिए हैं, हम उसे जीवन के अंतिम क्षण तक आत्मसात करने के लिए संकल्पित हैं।

क्या कहा था मोदी ने
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, अटलजी का जीवन आने वाली पीढ़ियों को सार्वजनिक जीवन के लिए, व्यक्तिगत जीवन के लिए, राष्ट्र जीवन के लिए समर्पण भाव के लिए हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा, मन यह मानने को तैयार नहीं है कि अटलजी अब हमारे साथ नहीं हैं। वह समाज के सभी वर्गों के प्रति प्रेम रखने वाले और सम्मानित व्यक्ति थे। अटल जी चाहते थे कि लोकतंत्र सर्वोच्च हो। पीएम मोदी ने कहा कि अटल जी का सिक्का हमारे दिलों पर 50 साल से ज्यादा चला। हम अगर उनके आदर्शों पर चलते हैं तो हम भी अटल बन सकते हैं। हमें उनकी जिंदगी से प्रेरणा लेनी चाहिए।

16 अगस्त को हुआ है निधन

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का इसी साल 16 अगस्त को निधन हो गया। अटलजी 93 साल के थे। अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। अटलजी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। हालांकि जब-जब देश के प्रधानमंत्री बने लखनऊ से सांसद निर्वाचित हुए। अटलजी ने 1990 में विदिशा संसदीय सीट से चुनाव जीत दर्ज की थी इसके बाद उन्होंने 1991 में उन्होंने विदिशा सीट छोड़ दी थी। अटलजी पहली बार यूपी के बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। वहीं, उन्हें ग्वालियर संसदीय सीट से माधवराव सिंधिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।