
आस्ट्रेलियन ग्रुप ने किया ब्रोल्गा डांस, बैगा कलाकारों ने सीखाई कर्मा डांस की स्टेप्स
भोपाल। मानव संग्रहालय, संस्कृति मंत्रालय और आस्ट्रेलियन हाई कमीशन, नई दिल्ली द्वारा जनजातीय नृत्यों पर केंद्रीत कम्यूनिटी आऊटरीच कार्यशाला में रविवार को बैगा और बांगरा डांस ग्रुप ने डांस परफॉर्मेंस दी। बैगा नृत्य के 20 जनजातीय कलाकारों और बांगरा नृत्य दल के18 सदस्यों में से छह ने अपने अनुभव शेयर करते हुए अपनी नृत्य कला के बारे में बताया।
बंगारा डांस कलाकार जैस्मीन शेपार्ड ने बताया कि भारत की जनजातीय कलाकारों के साथ नृत्य करना उनके लिए नया अनुभव रहा है। दोनों के रीति-रिवाज, जीवन पद्धति और डांस स्टाइल बिल्कुल अलग हैं। दोनों में बस एक चीज कॉमन है कि वे अपने-अपने देशों की हजारों साल पुरानी जनजाती का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दोनों ग्रुप्स ने जब साथ डांस किया बॉडी लैंग्वेज ही भाषा बन गई।
कार्यक्रम की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के मूल पक्षी ब्रोल्गा से प्रेरित होकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्वोत्तर अरनहेम क्षेत्र में पक्षी की आवाज के साथ किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया गया। वहीं, बैगा नृत्य समूह के लोगों ने कर्मा नृत्य प्रस्तुत करते हुए कर्मा गीत गाया।
बैगा नर्तकियों ने बंगारा समूह को अपने पारंपरिक टैटू के साथ-साथ अपने वस्त्र, आभूषण तथा परिधानों के प्रतीकों के बारे में बताया। फिर बंगारा नर्तकियों ने नृत्य के अलग-अलग स्टेप्स को करते हुए इनके बारे में बताया। बैगा कलाकारों ने अपने नृत्य के स्टेप्स का परिचय दिया। बैगा कलाकारों ने बताया कि ये डांस उनकी संस्कृति का हिस्सा है। इसे सीखने के लिए वे अलग से ट्रेनिंग नहीं लेते, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी सभी इसमें पारंगत होते जाते हैं।
शादी समारोह में होता है बिलमा डांस....
दुसरे चरण में बंगारा के मूल पक्षी ब्रोल्गा और डांस पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन किया गया। बैगा कलाकारों ने पारंपरिक वस्त्रों में बंगारा नर्तकियों को तैयार कर विवाह समारोह में किए जाने वाले बिलमा नृत्य को सिखाया। अंत में बंगारा नृत्य दल ने 2 कंपनी राइस(मेरे द्वीप से) और टुप-टुप(टोर्रेस स्ट्रेट द्वीप के जीवन से प्रेरित) नृत्य का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सूर्य कुमार पांडे भी मौजूद थे।
Published on:
22 Oct 2018 04:46 pm
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