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भोपाल. राजधानी की सेहत का ऑडिट किया तो तस्वीर चिंताजनक नजर आई। वर्ष 2009 के बाद पांच बड़े प्रोजेक्ट शहर में आए और इनके नाम पर जिस तरह हरियाली खत्म की गई।शहर के तमाम आर्किटेक्ट-पर्यावरणविद् हैरत में है। अब भी आने वाली सालों में पांच बड़े प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं। एक्सपट्र्स का कहना है कि शहर के प्राकृतिक संसाधनों को बचाते हुए विकास की योजना तैयार की जाए तो शहर और शहरवासियों की सेहत के लिए बेहतर रहेगा।
स्थिति- 01
2009 में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम से लेकर इसी साल नर्मदा प्रोजेक्ट, अरेरा पहाड़ी शौर्य स्मारक व अन्य प्रोजेक्ट में 25 हजार पेड़ काट दिए। 2009 के पहले जो सड़कें, हरे-भरे, ऊंचे पेड़ों से भरे हुए थे, अब इक्का-दुक्का पेड़ ही नजर आ रहे हैं।
स्थिति- 02
बड़ा तालाब के एफटीएल के अंदर से लेकर 50 मीटर बफर जोन तक 350 से अधिक पक्के निर्माण हो गए। 2005 से पहले सर्वे कर लगाई मुनारों में से 152 गायब हैं। सेप्ट की रिपोर्ट बताती है कि 10 साल में 9त्न तक कम हुआ तालाब का दायरा।
स्थिति 03
कलियासोत नदी के भीतर 14 पक्के प्रोजेक्ट के साथ 700 से अधिक स्लम एरिया के आवास बन गए। 2009 के बाद ही सब विकसित हुए। इससे पहले ये क्षेत्र यहां नहीं थे।
विशेषज्ञ बोले
सीपीए के रिटायर्ड सहायक कंजरवेटर केसी मल का कहना है कि भोपाल किनारे कलियासोत से केरवा और कोलार तक करीब छह हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है। ऐसे में कोई भी प्रोजेक्ट इन वन और प्राकृतिक संसाधनों को बचाते हुए प्लान करने की जरूरत है।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद का कहना है कि पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने प्रोजेक्ट्स की डिजाइन बदली जाती है। अतिरिक्त खर्च हो रहा हो तो उसे भी मंजूर किया जाता है। भोपाल में भी सामान्य की बजाय इनोवेटिव इंजीनियरिंग की जरूरत है।
प्राकृतिक संसाधनों को खत्म करने वाले ये हैं आगामी प्रोजेक्ट्स
-स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में टीटी नगर क्षेत्र के 6080 पेड़ चिह्नित है। इनमें से साउथ टीटी नगर में ही 3000 से अधिक पेड़ अभी काटना बाकी है।
-कोलार समानांतर लाइन प्रोजेक्ट के लिए शहर के भीतर 1200 पेड़ बाधक बन रहे हैं। इन्हें हटाने की कवायद की जा रही है।
-अरेरा कॉलोनी, तुलसी नगर, 74 बंगला क्षेत्र में चार बड़े व्यवसायिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपांतरित की जा रही है, यहां भी 300 से अधिक पेड़ आ रहे हैं
नोट- इस तरह के अन्य प्रोजेक्ट भी है, जिनमें प्राकृतिक संसाधन खत्म होंगे।
प्रोजेक्ट्स के लिए ऐसे कटी हरियाली
4000 पेड़ बीआरटीएस के लिए सीहोर नाका से मिसरोद के बीच काटे गए
6000 पेड़ 2006 में ही लगाए गए थे और महज पांच से छह साल बाद इन्हें अरेरा हिल्स पर शौर्य स्मारक के लिए काट दिया गया।
3500 पेड़ तीसरी रेल लाइन के लिए काटे गए।
3000 पेड़ नर्मदा प्रोजेक्ट की लाइन बिछाने के लिए काटे। मंत्रालय के सामने अरेरा हिल्स पर बड़े पेड़ काट दिए गए।
2500 से अधिक पेड़ लालघाटी से गांधीनगर ओर आगे नरसिंहगढ़ रोड के बीच नेशनल हाइवे व ब्रिज के लिए काटे गए।
नोट: मल्टीलेवल पार्किंग, लिंक रोड किनारे प्लेस मैकिंग प्रोजेक्ट, कोलार के केरवा से जलप्रदाय प्रोजेक्ट, सीवेज नेटवर्क, प्रोजेक्ट उदय के तहत पानी व सीवेज लाइन बिछाने जैसे प्रोजेक्ट में काटे गए पेड़ अलग है। करीब 25 हजार पेड़ काटे गए।
भोपाल प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और इसकी हरियाली, तालाब संरक्षण प्राथमिकता है। हमने स्पष्ट किया हुआ है कि प्रोजेक्ट की प्लानिंग इन्हें बचाते हुए की जाए।
जयवद्र्धन सिंह, मंत्री नगरीय निकाय एवं आवास
Published on:
30 Oct 2019 03:03 am
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