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भोपाल. आयोग के सदस्य बृजेश चौहान ने पत्र में उल्लेख किया है कि, आयोग के सदस्यों द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई संस्थाओं में विद्यार्थी या शिक्षक अल्पसंख्यक नहीं है न ही उनके शिक्षण का आधार धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्य होने से जुड़ा है। एेसे संस्थान केवल दो- तीन संचालकों के अल्पसंख्यक होने का फायदा उठाकर आरटीई में प्रवेश देने से बच रहे हैं।
यह शिक्षा के अधिकार का हनन हैं वहीं इससे उन गरीब असहाय बच्चों को सरकार की चलाई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है जो इसके असल हकदार हैं। उन्हें शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत २५ फीसदी सीटों पर कमजोर एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देना पड़ता। लेकिन कई संस्थान अल्पसंख्यक संस्थान न होने के बावजूद नियमों की आड़ में छूट का फायदा उठा रहे हैं।
आरटीई लागू करने वाले राज्य शिक्षा केन्द्र को पत्र लिखकर गलत तरीके से अल्पसंख्यक संस्थानों विद्यार्थियों और शिक्षकों को अल्पसंख्यता से कोई सम्बंध नहीं फिर भी आरटी 'पिछले दिनों देखा कि कई स्कूल अल्पसंख्यक संस्थान होने का दावा करते हुए आरटीई से बच गए। लेकिन एेसे स्कूल जहां न विद्यार्थी न ही शिक्षक अल्पसंख्यक है न ही किसी अल्पसंख्यक धर्म या भाषाई आधार पर शिक्षा ही दी जा रही है, केवल डायरेक्टर अल्पसंख्यक होने के नाम पर सर्टिफिकेट पाकर आरटीई से बच रहे हैं।
ऐसे में गरीब बच्चों का अधिकार मारा जा रहा है। मैने राज्य शिक्षा केन्द्र को पत्र लिखकर उन आधारों की जांच की मांग की है जिसके आधार पर इन्हें यह दर्जा हासिल हुआ। गलत तरीके से अल्पसंख्यक संस्थानों का दर्जा पाने वालों को बाहर करके अधिक से अधिक स्कूलों में आरटीई लागू करना चाहिए।Ó बृजेश चौहान, सदस्य, बाल आयोग
Published on:
27 Apr 2019 08:12 am
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