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candidate : हत्या के आरोप में फरार बबलू कमानी की पत्नी को भाजपा ने शुक्रवारी वार्ड से बनाया प्रत्याशी

- आर्म्स एक्ट, बलवा, मारपीट व कई मामलों में आरोपी है भाजपा नेता कमानी- एक साल से फरारी काट रहे बबलू की पत्नी को मंत्री गोपाल भार्गव के कोटे से दिया गया है टिकट

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Bablu Kamani's wife BJP candidate

- आर्म्स एक्ट, बलवा, मारपीट व कई मामलों में आरोपी है भाजपा नेता कमानी

सागर. पूर्व पार्षद के पुत्र की हत्या के आरोप में एक साल से फरार भाजपा नेता व पूर्व महापौर परिषद सदस्य शेख रशीद (बबलू कमानी) की पत्नी किश्वर बी को भाजपा ने शुक्रवारी वार्ड से पार्षद पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। बबलू कमानी के साल भर से फरार है जिसके विरुद्ध वर्ष-2011 में आर्म्स एक्ट, वर्ष-2016 में सदर में सांप्रदायिक तनाव के दौरान बलवा सहित पूर्व में गोपालगंज, कोतवाली, सदर व अन्य थानों में प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनमें से कुछ मामले अभी विचाराधीन हैं, तो कुछ में राजनीतिक रसूख के चलते पुलिस जांच के बाद खातमा भी लगा चुकी है वहीं कुछ में न्यायालय से दोषमुक्त रहा है। बबलू एक साल से अपने प्रतिद्वंद्वी और वार्ड से पूर्व पार्षद रहे नईम खान के पुत्र इमरान की हत्या के मामले में फरार है। पुलिस कई बार कोशिश करने के बाद भी उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

मंत्री भार्गव के कोटे से मिला टिकट
बबलू कमानी मंत्री गोपाल भार्गव का कट्टर समर्थक रहा है। पूर्व में वह दो बार पार्षद भी रह चुका है। बीते वर्ष हुई वारदात के बाद से बबलू फरार था जिसके कारण उसके किसी भी परिजन को टिकट मिलना मुश्किल था। दावेदारी में भी कोई नाम सामने नहीं आ रहा था लेकिन जैसे ही भाजपा की सूची जारी हुई और उसमें बबलू की पत्नी का नाम सामने आया तो शहर में चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि शुक्रवारी वार्ड में बबलू की पत्नी की ओर से दावेदारी किए जाने की बात भी सामने आ रही है।

अचानक से बढ़ी संपत्ति: सूत्र
सूत्रों की माने तो बबलू कमानी के पार्षद बनने के पूर्व बहुत ही कम सम्पत्ति थी लेकिन बाद में कई जगहों पर ठेकेदारी शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि बबलू ने अधिकांश ठेका दूसरे के नाम पर लिए, ताकि अघोषित संपत्ति की पोलपट्टी न खुल पाए। बबलू की पत्नी को टिकट देने के बाद से भाजपा संगठन चुप्पी साधे हुए है और कोई भी पदाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहा है।

हमेशा विवादों से जुड़ा रहा बबलू का नाम
फरारी के पूर्व बबलू का नाम हमेशा ही विवादों में रहा। सदर मामले में बबलू की भूमिका सबसे ज्यादा संवेदनशील रही, फिर भी भाजपा नेता चुप्पी साधे रहे। हालांकि दवाब बढऩे के बाद बबलू को एमआइसी से हटा दिया था। इसके साथ ही पुलिस में बबलू के विरुद्ध कई शिकायतें मारपीट, डराने-धमकाने में भी की गईं।