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छह साल से फाइलों में दबा है बड़ा तालाब का मास्टर प्लान, 1500 से अधिक अतिक्रमण बचा रहे अधिकारी

ताल बचाओ, शान बचाओ

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छह साल से फाइलों में दबा है बड़ा तालाब का मास्टर प्लान, 1500 से अधिक अतिक्रमण बचा रहे अधिकारी

छह साल से फाइलों में दबा है बड़ा तालाब का मास्टर प्लान, 1500 से अधिक अतिक्रमण बचा रहे अधिकारी

भोपाल. बड़ा तालाब संरक्षण के लिए अहमदाबाद की सेप्ट यूनिवर्सिटी से तैयार कराए बड़ा तालाब का मास्टर प्लान छह साल बाद भी फाइलों में दबा हुआ है। सेप्ट ने मई 2012 में काम शुरू किया और मार्च 2013 में जिम्मेदार अधिकारियों को प्लान सौंपा। इसमें तालाब किनारे अतिक्रमण व रसूखदारों के कब्जों की हकीकत बताते हुए इन्हें हटाने की अनुशंसा थी। नतीजतन प्लान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्लान को अमल में लाने की इच्छाशक्ति जिला व निगम प्रशासन नहीं दिखा सके। दरअसल, प्लान लागू करने से पहले सुझाव-आपत्तियां बुलाई जातीं। बड़े निर्माणों और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों पर सवाल खड़े होते। शासन-प्रशासन को कार्रवाई करना पड़ती। अब इसे प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान में शामिल करने का दावा है। आशंका है कि मास्टर प्लान में सेप्ट की पूरी रिपोर्ट शामिल नहीं होगी। कुछ प्रावधान शामिल करके लोगों को संतुष्ट करने की कवायद की जा रही है।
प्रशासन केवल सर्वे करता है, कार्रवाई नहीं
ब ड़ा तालाब किनारे जिला प्रशासन के सर्वे में 362 से अधिक अवैध पक्के निर्माण मिले हैं। तालाब के 50 मीटर दायरे में 20 से अधिक पक्के निर्माण एवं मैरिज गार्डन हैं। बोट क्लब पर नगर निगम ने दस हजार वर्गफीट का ओपन थियेटर तालाब के अंदर बनाया है। वन विहार से भदभदा रोड के पास तालाब किनारे दो नामी होटल हैं। भदभदा की ओर मत्स्य विभाग की जमीन पर तालाब से सटकर बड़ा निर्माण जारी है। खानूगांव में एक कॉलेज, पांच मैरिज गार्डन व शादी हॉल हैं। बैरागढ़ में बोरवन की ओर तालाब में दस हजार से अधिक झुग्गियां हैं। पर्यटन विकास निगम का सैर सपाटा, सांई व कैचमेंट में एक विश्वविद्यालय का कैंपस तैयार हो गया है। सेप्ट की रिपोर्ट में तालाब से 300 मीटर तक बने निर्माणों को हटाकर ग्रीनरी विकसित करने का प्रावधान था। यदि इस पर अमल किया जाता तो 1500 से अधिक बड़े व पक्के निर्माण हटाना पड़ते।

सेप्ट की रिपोर्ट मेरे कार्यकाल के पहले तैयार हो गई थी। इस बारे में पूछताछ की थी, इसे जाहिर क्यों नहीं किया गया? इसे लागू कब करेंगे? संबंधित एजेंसी और शासन से इस बारे में पूछताछ करूंगा।
आलोक शर्मा, महापौर व सेप्ट रिपोर्ट की साधिकार समिति के अध्यक्ष