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देखें video : बैसाखी पर्व- ऐसे गुरु को बल बल जाइए, आप मुक्त मोहे तारे

श्रद्धा, भक्ति के साथ मनाया बैसाखी पर्व

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श्रद्धा,भक्ति के साथ मनाया बैसाखी पर्व

श्रद्धा,भक्ति के साथ मनाया बैसाखी पर्व

भोपाल. गुरुद्वारा टीटी नगर में सभी गुरुद्वारों की संगत के सहयोग से बैसाखी पर्व श्रद्धा, भक्ति के साथ मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहब के चरणों में माथा टेका। सिख पंथ के महान रागी जत्था सरबजीत सिंह ने सभी देशवासियों को baisakhi festival बैसाखी के पावन पर्व की बधाई दी। कीर्तन में कहा गुरू सीखा मन बधाइयां जिन मेरा सतगुरु डीठा रामराज्य, और कहां ऐसे गुरु को बल बल जाइए, आप मुक्त मोहे तारे। इस मौक पर देश की सुख,समृद्धि , प्रगति , और खुशहाली की अरदास की। समाजसेवी गुरचरण सिंह अरोड़ा ने बताया कि इस अवसर पर सिख पंथ के महान रागी जत्था सरबजीत सिंह, कपूरथला पंजाब एवं संदीप सिंह नूरपुरी पंजाब कथा वाचक भाई मनदीप सिंह, मुरीद संगरूर पंजाब एवं हजूरी रागी, जत्था जरनैल सिंह ने अपने कीर्तन प्रवचन से संगत को निहाल कर दिया।

मंदिर में बंध रही मन्नत की ‘पन्नियां’, श्रद्धालु समझाने पर भी नहीं मानते
भोपाल. कई श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों में मनोकामना पूर्ति के लिए मन्नत मानने की परम्परा रही है और अलग-अलग तरीके से यह मांगी भी जाती है, लेकिन शहर के मंदिरों में पिछले कुछ समय से कुछ श्रद्धालु मन्नत के लिए मंदिर परिसर में अगरबत्ती और प्रसाद की पन्नियां बांध रहे हैं। इसके कारण न सिर्फ मंदिरों के सौंदर्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।
यहां दिखता है नजारा
शहर के प्राचीन काली मंदिर में गर्भगृह के पीछे परिक्रमा के दौरान कई श्रद्धालु पन्नी बांध देते हैं, साथ ही कई श्रद्धालु यहां चुनरी भी बांधते हैं। Temple मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने इसके लिए निर्देश भी दिए है, लेकिन फिर भी लोग बाज नहीं आ रहे। इसी प्रकार भवानी मंदिर परिसर में एक शेर की प्रतिमा है, श्रद्धालुओं द्वारा इस पर भी पन्नियां बांध दी जाती हैं। हाल ही में यहां से इन्हें हटाया गया है। इसके बाद फिर से श्रद्धालुओं ने इसे बांधना शुरू कर दिया है।
मंदिर में लगाएंगे दो मन्नत स्टैंड
भवानी मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश सैनी ने बताया कि यहां कई श्रद्धालु मन्नत के लिए कलावा बांधते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से इसकी जगह पन्नी बांधने लगे हैं, कई बार इन्हें खोलकर साफ कर दिया जाता है। लोगों को समझाइश भी देते हैं। समिति की ओर से शीघ्र ही दो मन्नत स्टैंड बनाकर रखे जाएंगे ताकि लोग यहां कलावा बांध सकें।
हर हफ्ते निकालते हैं पन्नी
काली मंदिर के रजनीश बगवार ने बताया कि मंदिर में कई लोग अगरबत्ती की sheets पन्नियां बांधते हैं, इन्हें हम हर दो तीन दिन में निकालकर फेंकते हैं, क्योंकि पन्नी बांधने की कोई परम्परा ही नहीं है। लोगों को समझाते भी हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं देता।
हटा देते हैं पन्नी
टीला जमालपुरा स्थित गोपाल मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रमोद नेमा ने बताया मंदिर में दर्शनार्थी सादे कागज पर उल्टा हाथ हल्दी से लगाकर चढ़ाते हैं और मन्नत पूरी होने पर सीधे हाथ का कागज, प्रसाद चढ़ाते है। यहां बने शिवालय की जाली में कई लोग पन्नी बांध जाते हैं जिन्हें हटा दिया जाता है।
लोगों को करेंगे जागरूक
षटदर्शन साधु समाज के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद ने कहा मन्नत के लिए पन्नी बांधने की परम्परा सनातन में नहीं है, यह गलत प्रथा है। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है। लोगों को जागरूक करने शीघ्र ही शहर में शिविर लगाएंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वे मंदिरों में पन्नियां न बांधे।

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