भोपाल

Bakra Eid 2017: इन मैसेजेस से दें बकरीद की मुबारकबाद, Facebook—Whatsapp पर भेजें ये संदेश

ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद इस बार दो सितंबर यानि कल मनाई जाएगी। इस दिन सक्षम मुसलमान अल्लाह की राह में बकरे की कुर्बानी देकर बकरीद मनाते हैं।

3 min read
Sep 01, 2017

भोपाल। इस त्‍योहार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इतना ही नहीं इसके लिए कई दिन पहले से तैयारियां भी शुरू कर देते हैं। ऐसे में अपने दोस्तों और परिवार वालों को बकरीद की मुबारकबाद देने के लिए आप कई प्रकार के मैसेजेस भेज सकते हैं। हम आपको यहां उन मैसेजेस के बारे में बारे में बता रहे हैं, जिनसे फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मुबारकबाद दे सकते हैं।

बकरीद के मैसेजेस...
- मुबारक हो आपको खुदा की दी हुई यह जिंदगी, खुशियों से भरी रहे आपकी यह जिंदगी, गम का साया कभी आप पर ना आए दुआ है यह हमारी, आप सदा यूं ही मुस्कराएं, ईद मुबारक...

- सूरज की किरणें, तारों की बहार, चांद की चांदनी अपनों का प्यार… आपका हर पर हो खुशहाल, मुबारक हो आपको बकरीद का त्यौहार...

- पानी झलकता है, फूल महकता है, और हमारा दिल तड़पता है, आपको बकरीद मुबारक कहने के लिए...

- चुपके से चांद की रोशनी छू जाए आपको, धीरे से ये हवा कुछ कह जाए आपको… दिल से जो चाहते हो मांग लो खुदा से, हम दुआ करते हैं वो मिल जाए आपको...

- आगाज ईद है, अंजाम ईद है, सच्चाई पे चलो तो हर गम ईद है… जिसने भी रखे रोजे, उन सबके लिए अल्लाह की तरफ से इनाम ईद है...

- Abraham was ready to sacrifice his only son. Sacrificing the most loved things will make you a better person to be loved by Allah. Happy Bakrid 2017...

- May Allah shower countless blessing upon you and your family. Keep me in your prayers. Happy Bakrid 2017...

- May Allah flood your life with happiness, love, wisdom on this blessed day of sacrifice. Happy Bakrid...

इसलिए मनाई जाती है बकरीद :
ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद इस बार आगामी दो सितंबर को मनाई जाएगी। बकरीद को इस्लाम में बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है। इस्लाम में एक साल में दो तरह ईद की मनाई जाती है। एक ईद जिसे मीठी ईद कहा जाता है और दूसरी बकरीद। एक ईद समाज में प्रेम की मिठास घोलने का संदेश देती है। तो वहीं दूसरी ईद अपने कर्तव्य के लिए जागरूक रहने का सबक सिखाती है। ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद का दिन फर्ज़-ए-कुर्बान का दिन होता हैं। बकरीद पर सक्षम मुसलमान अल्लाह की राह में बकरे या किसी अन्य पशुओं की कुर्बानी देते हैं।

क्यों मनाई जाती है बकरीद
ईद उल अज़हा को सुन्नते इब्राहीम भी कहते है। इस्लाम के मुताबिक, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के उद्देश्य से अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया। हजरत इब्राहिम को लगा कि उन्हें सबसे प्रिय तो उनका बेटा है इसलिए उन्होंने अपने बेटे की ही बलि देना स्वीकार किया।

इसलिए दी जाती है कुर्बानी
हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। जब अपना काम पूरा करने के बाद पट्टी हटाई तो उन्होंने अपने पुत्र को अपने सामने जिन्‍दा खड़ा हुआ देखा। बेदी पर कटा हुआ दुम्बा (साउदी में पाया जाने वाला भेंड़ जैसा जानवर) पड़ा हुआ था, तभी से इस मौके पर कुर्बानी देने की प्रथा है।

बकरीद पर कुर्बानी के बाद परंपरा :
Bakrid 2017 पर कुर्बानी के बाद आज भी एक परंपरा निभाई जाती है। इस्लाम में गरीबों और मजलूमों का खास ध्यान रखने की परंपरा है। इसी वजह से बकरीद पर भी गरीबों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। इन तीनों हिस्सों में से एक हिस्सा खुद के लिए और शेष दो हिस्से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों का बांटा दिया जाता है। ऐसा करके मुस्लिम इस बात का पैगाम देते हैं कि अपने दिल की करीबी चीज़ भी हम दूसरों की बेहतरी के लिए अल्लाह की राह में कुर्बान कर देते हैं।

Published on:
01 Sept 2017 01:50 pm
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