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किसानों की फसल बीमा की राशि से कर्ज वसूली कर रहे बैंक, जानिए क्या कहते हैं नियम

सात हजार 618 करोड़ रुपये मिले हैं किसानों को फसल बीमा राशि के रूप में    

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भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों की फसल बीमा की राशि से बैंक कर्ज वसूली कर रहे हैं. बीमा कंपनियों ने खरीफ 2020 और रबी 2020-21 की फसल बीमा राशि के रूप में किसानों के खातों में सात हजार 618 करोड़ रुपये की भारी—भरकम राशि जमा करा दी है, पर यह राशि किसान निकाल ही नहीं पा रहे हैं. बैंक बीमा की इस राशि से अपना कर्ज वसूल रहे हैं जिसके कारण किसानों में नाराजगी भी है. हैरत की बात तो यह है कि उन किसानों से भी राशि वसूली जा रही है जो नियमित भुगतान करते आ रहे हैं. कर्ज की इस वसूली में बैंक नियम—कायदों का पालन भी नहीं कर रहे.

प्रदेश के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ब्याज रहित अल्पावध‍ि ऋण साख सीमा के अनुसार देते हैं। खरीफ और रबी फसलों के लिए 75 प्रतिशत ऋण नकद राशि के रूप में और 25 प्रतिशत सामग्री के रूप में मिलता है। खरीफ सीजन का ऋण 28 मार्च और रबी सीजन का 15 जून तक चुकाना होता है। इसके बाद फिर नए सिरे से कर्ज मिल जाता है। 38 साढ़े चार हजार

किसान को फसल के लिए ऋण दिया जाता है, इसलिए उनका बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाता है। इसके पीछे यह मकसद है कि यदि प्राकृतिक आपदा की वजह से फसल प्रभावित हो तो बीमा राशि से कर्ज की भरपाई हो सके। ऋण राशि का समायोजन होने के बाद किसान को फिर ऋण देने का क्रम चलता रहता है पर राशि समायोजन के लिए किसान की सहमति अनिवार्य है।

सहकारिता विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो किसान नियमित ऋण अदायगी करते हैं, उनसे सहमति लेकर ही फसल बीमा की राशि से ऋण का समायोजन किया जा सकता है। केवल डिफाल्टर किसानों से फसल बीमा की राशि से शत प्रतिशत ऋण का समायोजन किया जाना चाहिए। स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी ऋण का समायोजन फसल बीमा की राशि से किया जा रहा है। उन किसानों से भी कर्ज वसूला जा रहा है जिनके द्वारा खरीफ फसलों के लिए गए अल्पावधि कृषि ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च 2022 है।

नियमानुसार ऐसे किसानों से बिना सहमति के फसल बीमा की राशि से ऋण का समायोजन नहीं किया जा सकता है। सहकारिता मंत्री डा.अरविंद सिंह भदौरिया के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि डिफाल्टर किसानों से ही वसूली होगी। बाकी किसानों के साथ कर्ज वसूली के लिए सहमति जरूरी होगी। वे ये भी कह चुके हैं कि किसी भी किसान से जबरदस्ती वसूली नहीं होगी।