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World Tourism Day : झीलों के शहर में ये हैं पसंदीदा टूरिस्‍ट प्लेस..

World Tourism Day : झीलों के शहर में ये हैं पसंदीदा Bhopal Tourist Places टूरिस्‍ट प्लेस..

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World Tourism Day

World Tourism Day : झीलों के शहर में ये हैं पसंदीदा टूरिस्‍ट प्लेस..

भोपाल. झीलों का शहर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पर्यटन की दृष्टि से अच्छा शहर है। यहां आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन स्‍थल मौजूद है। भोपाल स्टेशन से करीब 10 किलोमीटर की दूरी में यहां अपर लेक बड़ा तालाब पर्यटन स्थल मिल जाएगा। बड़ा तालाब एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील के रूप में भी जाना जाता है। यहीं पर वनविहार और मानव जनजाति संग्रहालय भी स्थित है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर आप भोपाल शहर के कई स्थलों पर घूम सकते हैं।

WorldTourismDay के अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज ने ट्वीट करते हुए विश्व पर्यटन दिवस की शुभकामनाएं दी। ट्वीट में कहा कि पर्यटन माध्यम हमारी कला, संस्कृति, धरोहर व परंपराओं से जुड़ कर आनंद व ज्ञान प्राप्त करना है। राष्ट्रीयता, राष्ट्र स्वरूप व सभ्यता को आत्मसात करें। इतिहास प्रेमी यहां के पुरातत्‍व संग्रहालय और भारत भवन की सैर कर सकते है जबकि धार्मिक लोग बिरला मंदिर, मोती मस्जिद और जामा मस्जिद में प्रार्थना कर सकते है।

अपर लेक - भोपाल के इस तालाब को बड़ा तालाब भी कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में अपर लेक कहते हैं बड़ा तालाब एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील के रूप में भी जाना जाता है। भोपालवासियो के लिए इसे पीने के पानी का सबसे मुख्य स्रोत माना जाता है। इस तालाब की खूबसूरती खुद में सब कुछ कह जाती है। इसे देखने के लिए दूर से लोग आते हैं। शाम को यहां का नजारा देखने लायक होता है।

वन विहार - भोपाल शहर के बीच में स्थित वनविहार को नेशनल पार्क कहा जाता है। भोपाल घूमने आने वालों के लिए यह एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है। जिन्‍हे वन विहार नामक प्राकृतिक वन्‍यजीव पार्क में पाला जाता है।

यहां आपको चिड़ियाघर के साथ जंगली जानवरों का रेस्क्यू सेंटर मिलेगा। यह पांच किलोमीटर में फैला हुआ है। यह एक तरफ पहाड़ी और दूसरी तरफ बड़ी झील से घिरा हुआ है। यहां आप बाघ से लेकर मगरमच्छ आसानी से देखने सकते हैं।

जनजातीय संग्रहालय - देश में एक मात्र जनजातीय संग्रहालय है। यह भोपाल में श्यामला पहाड़ी पर बना है। इस संग्रहालय की स्थापना का उद्देश्य मध्यप्रदेश की जनजातियों और उनकी जीवनशैली से लोगों को रुबरु कराना है। इसक प्रतीक चिन्ह बिरछा है। इस म्यूजियम में की छह जनजातियों की जीवनशैली को दर्शाया गया है।

बिरला मंदिर - बिरला मंदिर भोपाल पर्यटन की एक झलक है। यहां संग्रहालय में कई प्रकार की कला और सामग्री है जो पर्यटकों को राज्‍य के इतिहास के बारे में जानकारी प्रदान करते है। यहां कई मूर्तियों को भी रखा गया है जो 13 वीं और 7 वीं सदी के बीच की हैं। यहां प्रदर्शन के लिए 2 शताब्‍दी से पहले के सिक्‍के और पांडुलिपि रखे गए हैं।

शौर्य स्मारक - देश की आजादी और सीमा की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले ऐसे ही शहीदों को आदर और श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से भोपाल के अरेरा हिल्स पर 'शौर्य स्मारक' का निर्माण किया गया है। भारतीय सेनाओं के पराक्रम और शूरवीर योद्धाओं की शौर्य गाथाओं को बताने वाला यह देश में अपनी तरह का इकलौता स्मारक माना जाता है। चिनार पार्क के समीप अरेरा हिल्स पर स्थित ये स्मारक करीब 13 एकड़ में फैला है।

गौहर महल - बड़े तालाब के किनारे वी.आई.पी. रोड पर बड़ी झील के किनारे बना है। यह ख़ूबसूरत महल कुदसिया बेगम के काल का है। यह महल भोपाल रियासत का पहला महल है। इस महल को हिन्‍दु और मुग़ल कला का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां दीवान-ए आम और दीवान-ए-ख़ास हैं। यहां कई महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों को भी देखा जा सकता है इनमें से कुछ गौहर महल, शौकत महल, पुराना किला और सदर मंजिल है।

भोजपुर - राजधानी भोपाल से इसकी दूरी 32 किलोमीटर है। यह भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता हैं। भोजपुर के इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने करवाया था। जबकि कुछ लोग ये भी कहते हैं कि इसका निर्माण पांडवों ने किया था। यहां 22 फीट उंचा शिवलिंग है।

ताज- उल- मस्जिद - भोपाल में स्थित इस मस्जिद की गिनती विश्व की तीसरी बड़ी मस्जिद में होती है। ताज- उल- मस्जिद उंची जगती पर बनी है, जिसका विशाल प्रांगण इसकी भव्यता को दर्शाता है। इसका मुख्य दरवाजा 74 फीट उंचा है। इसमें महिलाएं भी नवाज अदा कर सकती है। पर्यटकों के लिए यहां आना ये एक शानदार अनुभव हो सकता है।

केरवा बांध - शहर के बाहरी इलाके में प्रसिद्ध पिकनिक स्‍पॉट है जो सुंदर दृश्‍य प्रस्‍तुत करता है। यहां से पूरे भोपाल शहर में फिल्टर पानी पाइपलाइन द्वारा भेजा जाता। साथ नौका विहार के लिए भी यह अच्छी जगह है।

भीमबेटका - भीमबेटका की गुफाएं जो एमपी के रायसेन ज़िले में स्थित है। भोपाल से इसकी दूरी 46 किलोमीटर है। ये गुफाएं चारों ओर से विंध्य पर्वत से घिरी हुईं हैं। इसके दक्षिण में सतपुड़ा की पहाड़ियां शुरू हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि यह स्थान महाभारत के चरित्र भीम से संबन्धित है एवं इसी से इसका नाम भीमबैठका पड़ा। बीते युग की दुनिया का हिस्सा महसूस करने के लिए भीमबेटका आदर्श जगह है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है.

मनुआभान टेकरी - मनुआभान की टेकरी भी यहां का अन्‍य पिकनिक स्‍थल है जो एक पहाड़ी चट्टान पर स्थित होने के कारण शहर का मनोरम दृश्‍य प्रस्‍तुत करता है, पिकनिक स्‍पॉट होने के अलावा यह जगह जैनियों के लिए धार्मिक जगह भी है। यहां से राजाभोज एयर पोर्ट पर आने जाने वाली फ्लाइटों का भी नजारा देख सकते है।