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भाई दूज 9 नवंबर को, जानें तिलक शुभ मुहूर्त, समय और महत्व

भाई दूज की पूजा विधि, यह पर्व यमद्वितीया के नाम से भी...

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भाई दूज 9 नवंबर को, जानें तिलक शुभ मुहूर्त, समय और महत्व

भोपाल। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानि 09 नवम्बर, 2018 के दिन भाई दूज का पर्व बडी धूमधाम से मनाया जाता है। भाई दूज के इस पर्व को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भाई दूज पर्व भाईयों के प्रति बहनों के श्रद्धा व विश्वास का पर्व है। इस पर्व को बहनें अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगा कर मनाती है और भगवान से अपने भाइयों की लम्बी आयु की कामना करती है।

यह पर्व मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे देश में मनाया जाता है। वहीं शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि जब अपराह्न (दिन का चौथा भाग) के समय आये तो उस दिन भाई दूज मनाई जाती है।

हिन्दूसमाज में भाई -बहन के स्नेह व सौहार्द का प्रतीक यह पर्व दीपावली दो दिन बाद मनाया जाता है। यह दिन क्योकि यम द्वितीया भी कहलाता है, इसलिये इस पर्व पर यम देव की पूजा भी की जाती है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार एक मान्यता के अनुसार इस दिन जो यम देव की उपासना करता है, उसे असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है।

भाई दूज शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त शुरू- दोपहर 1:10 मिनट
शुभ मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3:27 मिनट
शुभ मुहूर्त की अवधि- 2 घंटे 17 मिनट


यह पर्व भी अन्य त्यौहारों की तरह परम्पराओं से जुडा हुआ है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर, उपहार देकर उसकी लम्बी आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन कि रक्षा का वचन देता है, इस दिन भाई का अपनी बहन के घर भोजन करना विशेष रुप से शुभ होता है।

पूजा विधि puja vidhi of bhai dooj ...
बहनें इस दिन सबसे पहले आटे का चौक तैयार करें। भाई को चौक पर बिठाएं और हाथों की पूजा करें। पूजा के लिए भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाएं। जिसके बाद इसमें सिंदूर लगाकर पान, सुपारी, कद्दु के फूल आदि हाथों पर रखकर धीरे से हाथों पर पानी छोड़े और मंत्र जपें।

कई जगहों पर बहने इस अवसर पर भाइयों की आरती भी उतारती हैं और हाथों में कलावा बांधती हैं। मूंह मीठा करने के लिए मिश्री खिलाएं। इसके बाद संध्या में यमराज के नाम से चौमुखा दीया जलाकर बहनें घर के बाहर उसका मुख दक्षिण दिखा की तरफ रख दें।

ज्ञात हो कि इस दिन बहन के घर भोजन की परंपरा है। मान्यता है कि यमुना ने भाई यम को इस दिन खाने पर बुलाया था। इसी वजह से इसे यम द्वितिया भी कहा जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन अपनी बहन के यहां भोजन करता है वह साल भर हर झगड़े से दूर रहता है। साथ उसी शत्रुओं का कोई भय नहीं होता, हर तरह के संकट से छुटकारा मिलता है, साथ ही भाई का कल्याण होता है।


भाई दूज की मान्यता Believes about Bhai Dooj
एक पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुना ने इसी दिन अपने भाई यमराज की लम्बी आयु के लिये व्रत किया था, और उन्हें अन्नकूट का भोजन खिलाया था। मिथिला नगरी में इस पर्व को आज भी यमद्वितीया के नाम से जाना जाता है। इस दिन चावलों को पीसकर एक लेप भाईयों के दोनों हाथों में लगाया जाता है और साथ ही कुछ स्थानों में भाई के हाथों में सिदूर लगाने की भी परम्परा देखी जाती है।

भाई के हाथों में सिंदूर और चावल का लेप लगाने के बाद उस पर पान के पांच पत्ते, सुपारी और चांदी का सिक्का रखा जाता है, उस पर जल उडेंलते हुए भाई की दीर्घायु के लिये मंत्र बोला जाता है। भाई अपनी बहन को उपहार व मिठाई देते है, देश के अलग- अलग हिस्सोम में इस परम्परा में कुच न कुछ अंतर आ ही जाता है।

भाई दूज से जुडी अन्य मान्यता Believes Related to Bhai Dooj
भाई- बहनों से जुडे जितने पर्व मनाये जाते है, उनमें रक्षा-बंधन और भाई-दूज दो पर्व विशेष है। कथा के अनुसार यम देवता ने अपनी बहन को इसी दिन दर्शन दिये थें। यम की बहन यमुना अपनी बहन से मिलने के लिये अत्यधिक व्याकुल थी। अपने भाई के दर्शन कर यमुना बेहद प्रसन्न हुई।

यमुना ने प्रसन्न होकर अपने भाई की बहुत आवभगत की। यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदा दिया कि इस दिन अगर भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेगें, तो उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी।

इसी कारण से इस इन यमुना नदी में भाई- बहन के साथ स्नान करने का बडा महत्व है। इसके अलावा यम ने यमुना ने अपने भाई से वचन लिया कि आज के दिन हर भाई को अपनी बहन के घर जाना चाहिए। तभी से भाई दूज मनाने की प्रथा चली आ रही है। जिन भाईयों की बहनें दूर होती है व भाई अपनी बहनों से मिलने भाईदूज पर अवश्य जाते है। और उनसे टीका कराकर उपहार आदि देते है।


भाई दूज विधि- विधान Bhai Dooj Puja Methods
भाई दूज पर्व पर बहनें प्रात: स्नान कर, अपने ईष्ट देव का पूजन करती है और भाई के आने पर उसे उपयुक्त स्थान देते हुए। चावल के आटे से चौक तैयार करती है। इस चौक पर भाई को बैठाया जाता है और उनके हाथों की पूजा की जाती है। भाई की हथेली पर बहने चावल का घोल लगाती है। उसके ऊपर सिन्दुर लगाकर कद्दु के फूल, पा, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर धीरे धीरे हाथों पर पानी छोडते हुए मंत्र बोला जाता है।

कहीं-कहीं इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती है और फिर हथेली में कलावा बांधती है। भाई का मुंह मीठा करने के लिये भाईयों को माखन - मिश्री खिलाती है। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर दीये का मुख दक्षिण दिशा की ओर करके रख देती है। इस दिन आसमान में उड्ती हुई चील देखने के विषय में यह मान्यता है कि बहने भाईयों की आयु के लिये जो दुआ मांगती है, वह दूआ पूरी होती है।


भाई दूज पर्व का महत्व Importane of Bhai Dooj
भाई दूज पर्व क्योकि यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भाई -बहन के बीच स्नेह के बंधन को और भी मजबूत करता है। भारतीय परम्परा के अनुसार विवाह के बाद कन्या का अपने घर, मायके में कभी-कभार ही आना होता है। मायके की ओर से भी परिवार के सदस्य कभी-कभार ही उससे मिलने जा पाते है।