13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तलाक की दहलीज पर पहुंच गया था मामला, एसडीएम ने बचाई रिश्तों की टूटती डोर

- लव मैरिज करने वाले कपल के हैं तीन बच्चे, सास ने लगाया था बेटों से भरण पोषण का केस, बाद में पहुंच गई बहू

2 min read
Google source verification
moradabad

शादी में बीफ परोसने से किया इनकार तो दूल्हे ने तोड़ दी बारात

भोपाल। भरण पोषण के एक केस में एसडीएम हुजूर की तरफ से किए गए दो आदेश ने एक परिवार को फिर से जोड़ दिया। मां ने बेटों पर भरण पोषण का केस किया, दोनों बेटों को दो हजार रुपए भरण पोषण के आदेश हो गए। लेकिन केस यहां खत्म नहीं हुआ बल्की शुरू हुआ था।

छोटे बेटे की बहू जो तीन बच्चों को लेकर अलग रह रही थी। उसने भी जाकर अपने पोषण का दावा कर दिया। बंद केस को फिर से खुलवाने के लिए एसडीएम हुजूर राजकुमार खत्री ने कलेक्टर से स्पेशल परमिशन ली। तलाक की दहलीज तक पहुंच चुके केस में चार महीने में ३५ पेशी के बाद आखिरकार पूरा परिवार एक हो गया। अब सभी लोग साथ में रहते हैं।

संदीप राठौर निवासी अरेरा कॉलोनी एक हॉस्पिटल में कार्यरत हैं। मां लक्ष्मी राठौर ने बेटे संदीप और संजय पर भरण पोषण करने का आवेदन एसडीएम हुजूर के यहां किया था। सुनवाई के बाद १० अगस्त २०१८ को एसडीएम ने दोनों बेटों को आदेश दिए कि वे मां को भरण पोषण का दो हजार रुपए प्रतिमाह देंगे। आदेश के अगले दिन संदीप की पत्नी माधुरी एसडीएम कार्यालय पहुंच गई और गलत जानकारी देकर भरण पोषण कराने की बात बताते हुए एक आवेदन अपने भरण पोषण का प्रस्तुत कर दिया।

एसडीएम ने केस को फिर से खोलने के लिए कलेक्टर से परमिशन ली। दोनों पक्षों को पेशी लगाकर बुलाया। एक के बाद एक कई पेशियां कराईं। बातचीत का दौर चला तो पता लगा संदीप ने लव मैरिज की है और तीन बच्चे भी हैं, इसी बीच परिवार में छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों की डोर कमजोर पडऩे लगी, परिवार बिखर कर अलग रहने लगा था।

एसडीएम ने कभी बहू की सास के साथ काउंसलिंग कराई, कभी दोनों पति पत्नी को साथ बैठाया। आखिर में जाकर दोनों पक्षों में सहमति बनने लगी। छोटी-छोटी बातों से जो मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया उसे फिर से जोड़ते हुए सभी को राजीखुशी सहमति कराते हुए घर भेज दिया। आज पूरा परिवार एक साथ रह रहा है।