18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भोपाल बोट कांड : उम्मीदों ने भी दम तोड़ा

संकट : दुखी परिवारों ने हादसे के लिए जिला प्रशासन को बताया जिम्मेदार

less than 1 minute read
Google source verification

image

Anwar Khan

Mar 23, 2016

family

family


भोपाल.
छोटे तालाब में हुए हादसे में बच्चों के साथ पांच परिवारों की उम्मीदों की मौत हो गई। विधवा मां का एकलौता सहारा चला गया तो बूढ़े बाप का कमाने वाला पूत। परिवार को इसका भी दुख है कि जिला प्रशासन ने उन्हें महज एक लाख रुपए की सहायता देकर मदद की बजाए उनके जख्मों पर नमक लगाया है। उनका कहना है कि यदि उन्हें जल्द ही और अधिक आर्थिक सहायता नहीं मिली तो धरना देंगे। प्रशासन को समझनी चाहिए जिम्मेदारी : मृतक विशाल की मां गंगा मालवीय ने कहा कि उस दिन मैंने विशाल को जाने से बहुत रोका था, लेकिन वह नहीं माना। उसे तो तैरना भी आता था। वह हेयर कटिंग का काम सीख रहा था, ताकि पिता का हाथ बंटा सके। बच्चे तो नादान होते हैं, लेकिन प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए थी।


बुढ़ापे में हमारा ख्याल कौन रखेगा : विशाल तीन भाई-बहनों में बड़ा था। दसवीं की पढ़ाई के साथ ही दो महीने पहले ही उसने प्रॉपर्टी डीलर के यहां नौकरी शुरू की थी। मैं आंगनवाडी में काम करके महज 1200 रुपए महीना ही कमा पाता हूं। मेरी उम्र भी हो चली है। अब बुढ़ापे में हमारा ख्याल कौन रखेगा।

-राजा मीणा, मृतक विशाल के पिता


मेरे पति की बीस साल पहले मौत हो चुकी है। झाडू-पोंछा कर पांच बच्चों को पाला। प्रशासन की लापरवाही से अजय की मौत हो गई। अब एक लाख का चेक थमा दिया गया। क्या इतनी राशि से हमारी जिंदगी कट पाएगी। यदि सरकार हमारी मदद नहीं करेगी तो हम क्या खाएंगे। बुढ़ापे की लाठी तो चली गई, अब प्रशासन से ही हमारी आस है।

-बतीबाई अहिरवार, मृतक अजय की मां

बड़ी खबरें

View All

ट्रेंडिंग