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92 करोड़ रुपए का बस स्टैंड अब तक नहीं बना

भोपाल के विद्यानगर में 92 करोड़ रुपए में प्रस्तावित बस स्टैंड अब तक नहीं बन पाया। पांच एकड़ क्षेत्रफल पर बस टर्मिनल को बनाने एक साल पहले कवायद शुरू हुई थी, लेकिन जमीन पर अब तक नहीं उतर सकी।

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- बीडीए हैं निर्माण एजेंसी, इसके लिए बीडीए की बोर्ड बैठक में पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
- यहां बस टर्मिनल के साथ व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स भी बनेगा
भोपाल। होशंगाबाद रोड पर विद्यानगर में बस टर्मिनल पर एक साल बाद भी काम आगे नहीं बढ़ पाया। 92 करोड़ रुपए की लागत इसके िलिए तय की गई थी, लेकिन देरी से लागत में हर साल पांच से दस फीसदी तक की बढ़ोतरी की आशंका है। भोपाल विकास प्राधिकरण इसका निर्माण कराना है।

पांच एकड़ क्षेत्रफल में इस बस टर्मिनल के साथ व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का भी प्लान है। इस बस स्टैंड में होशंगाबाद तरफ से आने वाली बसें रूकेंगी। यहां बस स्टैंड के साथ कमर्शियल कॉम्पलेक्स, रेस्टोरेंट भी बनेगा। गौरतलब है कि शहर के चारों कोनों पर इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आइएसबीटी) के लिए तत्कालीन महापौर आलोक शर्मा की परिषद ने प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद बीडीए ने अपनी बोर्ड बैठक में इसे मंजूरी दी। खजूरीकलां में भी करीब 53 करोड़ की लागत वाले आइएसबीटी को मंजूर किया गया है। इसके ही अगले चरण में ही मिसरोद के पास विद्यानगर और फिर बैरसिया रोड पर आइएसबीटी बनाना तय था। इसका उद्देश्य बसें शहर के चारों कोनों में आकर खड़ी हों और संबंधित क्षेत्र के यात्री वहां से सिटी ट्रांसपोर्ट से आगे जाएं। बैरागढ़ में भी आइएसबीटी प्रस्तावित है। यहां सीहोर नाके के पास पहले से बस टर्मिनल है, उसमें ही सुधार किया जाएगा।

फिलहाल शहर में हबीबगंज क्षेत्र के कुशाभाऊ ठाकरे आईएसबीटी बस स्टैंड के साथ नादरा बस स्टैंड, हलालपुर बस स्टैंड हैं। हबीबगंज आईएसबीटी को छोड़ दें तो बाकी में यात्रियों की सुविधाओं के लिए कुछ भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में नए आईएसबीटी से यात्रियों को सर्वसुविधायुक्त बस स्टैंड की सुविधा मिल जाएगी। इसके निर्माण के लिए केंद्र से आर्थिक मदद मिल रही है।

ये रहेगी चुनौती
हबीबगंज आईएसबीटी की तरह विद्यानगर आईएसबीटी में भी बसों को खासकर रसूखदारों की बसों को अंदर प्रवेश कराना बड़ी चुनौती होगी। हबीबगंज आईएसबीटी में कुछ रसूखदार ट्रेवल्स की बसों ने अपने खुद के काउंटर बनाकर वहीं बस स्टैंड बना लिया है। ये यात्रियों को आईएसबीटी के अंदर पहुंचने के पहले ही अपनी बसों में बैठा लेते हैं। बसों की नंबरिंग का ध्यान भी नहीं रखा जाता। सबसे महत्वपूर्ण ये कि अंदर बसों के खड़े रखने की जगह पर खराब और कबाड़ बसों को रखा जा रहा है, जिससे भी दिक्कत है। यही दिक्कतें विद्यानगर समेत अन्य आईएसबीटी में रहेगी। इसका विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। ये बड़ी चुनौती भी है।

कोट्स
यात्रियों की सुविधा के लिए आईएसबीटी जरूरी है। इसके काम को लेकर जल्द ही समीक्षा कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
- गुलशन बामरा, संभागायुक्त