
Bhopal bypass underpass ratapani wildlife corridor(photo: AI)
MP News: पेंच-नौरादेही टाइगर रिजर्व की तरह अब भोपाल के पश्चिमी बायपास में भी 5 किमी के वनक्षेत्र में सात जगह अंडरपास बनाने की तैयारी है। हालांकि पेंच की तरह ही ये अंडरपास साउंडप्रूफ रहेंगे या सामान्य अभी स्पष्ट नहीं है। 35.611 किमी लंबाई के भोपाल जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के भानपुर केकडिय़ा में पांच किमी के वनक्षेत्र से गुजरेगा। एमपीआरडीसी ने प्रोजेक्ट की जमीन को लेकर प्रशासन की दी वन पर्यावरणीय असर की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आया। 35.60 किमी के बायपास में सिर्फ भानपुर केकडिय़ा में ही 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेसर सरकारी जमीन का अधिग्रहण होगा। प्रोजेक्ट में बड़ा तालाब का कैचमेंट भी आ रहा है। इसमें पानी न रुके, इसके लिए 70 नालों से पानी तालाब की ओर बढ़ाया जाएगा।
पेंच टाइगर रिजर्व एनएच-44 देश का पहला लाइट एंड साउंड प्रूफ अंडरपास है। इसमें 9 अंडरपास बनाए गए हैं, जिनमें से एक की लंबाई लगभग 1.4 किमी है। इसे दुनिया के सबसे लंबे वन्यजीव अंडरपासों में गिना जाता है। यहां साउंड प्रूफ तकनीक का उपयोग किया है, ताकि वाहनों के शोर और लाइट की चकाचौंध से जानवर विचलित न हों, बाघों व अन्य जीवों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैले नौरादेही में रेलवे और सड़क मार्गों पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बड़े बदलाव किए गए हैं। कटनी-बीना रेल लाइन के दोहरीकरण के दौरान नौरादेही के बीच से गुजरने वाले ट्रैक पर विशेष दीवारों व साउंड प्रूफ सुविधा वाले अंडरपास और ओवरपास का निर्माण किया गया है। नौरादेही-रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व अंडरपास के अंदर का फर्श कंक्रीट के बजाय मिट्टी और घास से ढंका जाता है, ताकि जानवरों को यह उनके प्राकृतिक जंगल जैसा ही लगे।
सुरक्षित पारगमन: वन्यजीवों को वाहनों से टक्कर के बिना सड़क पार करने की सुविधा।
पारिस्थितिक कनेक्टिविटी: यह सुनिश्चित करना कि राजमार्गों से जंगल के दोनों ओर के वन्यजीवों का संपर्क न टूटे।
दुर्घटनाओं में कमी: सड़क पर जानवरों के आने से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी।
अंडरपास बनने से बाघ, तेंदुए, जंगली कुत्ते (ढोल), सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर और साही जैसे वन्यजीवों को सबसे अधिक फायदा होता है। ये मार्ग उन जानवरों के लिए सुरक्षित पारगमन प्रदान करते हैं जो राजमार्गों को पार करते समय दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
प्रशासन तय नियमों से प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया कर रहा है। शासन से जैसे आदेश होंगे, उसके अनुसार काम करेंगे।
-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
Updated on:
25 Mar 2026 09:43 am
Published on:
25 Mar 2026 09:08 am
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