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जब शहर 35 डिग्री में तपता है तब भेल इलाके में 5 डिग्री कम रहता है तापमान

भेल क्षेत्र में गर्मियों के दिनों में भी सुबह-शाम ठंडक रहती है। नर्मदापुरम रोड सहित अन्य जगहों का तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस होता है, तब भेल क्षेत्र के आसपास के क्षेत्र में तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस होता है।

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FOREST

भोपाल. भोपाल की दो ही पहचान है। झीलों की नगरी और यहां की ग्रीनरी। पूरा शहर पेड़-पौधों और बड़े-बड़े वृक्षों से आच्छादित है। लेकिन भेल क्षेत्र की बात ही कुछ और है। यहां गर्मियों के दिनों में भी सुबह-शाम ठंडक रहती है। कारखाने के चारों ओर बाग-बगीचे और सघन वन हैं। इसीलिए जब नर्मदापुरम रोड सहित अन्य जगहों का तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस होता है, तब भेल क्षेत्र के गुलाब उद्यान से पंचवटी मार्केट की ओर जाने वाली सड़क और गोविंदपुरा आइटीआइ से अन्ना नगर बीएचईएल की ओर आने वाली सड़क और चिल्ड्रन पार्क के आसपास के क्षेत्र में तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस होता है।
छह साल में रोपे डेढ़ लाख पौधे
भेल प्रबंधन ने यहां खाली पड़ी जमीन पर प्रतिवर्ष 30 हजार से ज्यादा पौधे लगाए। इस तरह छह साल में करीब डेढ़ लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। गर्मी के दिनों में टैंकरों से पानी भरकर इनकी सिंचाई कराई जाती है।
18 से 20 जगहों पर तैयार सघन वनभेल क्षेत्र में 18 से 20 सघन वन हैं। जम्बूरी मैदान के आसपास और अवधपुरी के किनारे वर्षों पहले लगे पौधे मौजूदा अब बड़े पेड़ बन चुके हैं। एसओएस बालग्राम के पास, पिपलानी 11 सौ क्वार्टर के पास दोनों ओर, अयोध्या बायपास के पास, आनंद नगर के पास, पिपलानी पेट्रोल पंप के पीछे, पद्रमा नगर बरखेड़ा पठानी, कटारा रोड बरखेड़ा पठानी, कस्तूरबा अस्पताल के पीछे, गुलाब उद्यान के आसपास सहित अन्य जगहों पर सघन वन हैं।
रेन वाटर हार्वेस्टिग पॉंड
भेल प्रशासन ने जल संरक्षण के लिए आम बगिया, बरखेड़ा चर्च और धनवंतरि पार्क के बगल दो तालाब बनाए हैं। बारिश का पानी इन तालाबों मे इकट्टा होता है। इससे गर्मी में जंगलों मेंं पानी दिया जाता है। जल स्तर भी बढ़ता है।
286 वर्ग किमी शहरी क्षेत्र
दो दशक पहले भोपाल के 286 वर्ग किमी क्षेत्र में हरियाली 66 प्रतिशत थी। लेकिन यह घटकर महज 22 प्रतिशत रह गई है। यह अनियोजित शहरीकरण का परिणाम है। इसका असर पयार्वरण में असंतुलन, गिरते जलस्तर और बढ़ते तापमान के रूप में सामने आ रहा है।
तापमान में आठ प्रतिशत का इजाफा
रिसर्च बताती है कि शहर के तापमान में पिछले 12 साल में आठ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसकी बड़ी वजह जलस्रोतों पर अतिक्रमण और तेजी से हरियाली का घटना है।
पेड़ों से माइक्रो क्लाइमेट पर असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ होने और न होने की जगहों के तापमान में 1-2 डिग्री सेटीग्रेड का अंतर होता है। पेड़ घने हों, तो तापमान का अंतर बढ़ जाता है। जिन कांक्रीट के घरों पर पेड़ों की छांव रहती है, उनमें तपन कम लगती है। पेड़ पानी भी छोड़ते हैं, जिससे माइक्रो क्लाइमेट में 2-3 डिग्री का फर्क पड़ता है। जहां सड़कों के दोनों ओर पेड़ होते हैं, वहां भी तपन कम होती है।

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