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35 साल बाद भी कातिलों को नहीं मिली सजा, तख्ती लेकर मांग रही न्याय की गुहार

सिर्फ आश्वासन ही मिलता आया है।

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भोपाल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की सबसे बड़ी त्रासदी के 35 साल बाद भी अब तक गैस पीड़ितों के कातिलों को सजा नहीं मिली। न्याय की गुहार लगाते वर्षों बीत गये, लेकिन सरकार ने अब तक गैस पीड़ितों की नहीं सुनी। ये बात सोमवार को भोपाल के छोला दशहरा मैदान में अपने परिजनों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे गैस पीड़ित संगठनों ने कही। पेंशन भोगी संघर्ष पार्टी कि पीड़ित महिलाएं पेंशन को लेकर वर्षों से संघर्ष की लड़ाई लड़ रही हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता आया है। इस मौके पर तख्तियां लेकर पीड़ित महिलाओं ने अपनी बात कहते हुए। भोपाल गैस त्रासदी के दिवंगतों को श्रद्धंजलि दी।

साइनाइड गैस के रिसाव से हुआ था हादसा

पूर्व डायरेक्टर मेडिको लीगल डॉ. डीके सतपथी बताते हैं कि गैस पीडि़तों को गलत उपचार दिए जाने के पीछे सोची-समझी चाल थी। तंत्र यूनियन कार्बाइड के मालिक एंडरसन को बचाने में लगा था। सोडियम थायो सल्फेट इंजेक्शन दिए जाने से यह खुलासा हो रहा था कि साइनाइड गैस का रिसाव हुआ था। संभावना क्लीनिक अध्यक्ष सतीनाथ षडंगी ने बताया कि जब हमें पता चला है कि लोगों को यह दवाई नहीं दी गई है तो हमने खुद अपनी क्लीनिक खोलकर 20 दिन तक 1300 लोगों को सोडियम थायो सल्फेट दिया। 7 दिन में ही पीडि़त ठीक होने लगे थे, लेकिन तब हमें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

3 दिसंबर 1984 की भयावह तस्वीर आज भी दर्द देती है

1984 की तारीख 3 दिसंबर जब-जब कैलेंडर के पन्नों पर आती है तब-तब ये घाव और भी बढ़ जाता है। जिन्होंने वो भयावह तस्वीर अपनी आखों से देखें है उनकी आंखें आज भी भर आती हैं। दर्द में महरम लगाने की हर तरह से कोशिश की गई, पर आज भी वहां की आबोहवा में वो जहर के दंश की झलक दिखाई दे रही।

रिपोर्ट के पन्नों में हर साल कुछ न कुछ नये खुलासें होते हैं। तारीख 3 दिसंबर की तस्वीर एक बार फिर उकेरी जाती है। पीड़ितों से फिर सवाल होते हैं, सावल कई है लेकिन जो आज भी आपने घाव को लेकर जिंदगी के दिन गिन रहें और उनके ही घाव का असर परझाई बनकर उनके आने वाली पीढ़ियों पर दिखाई दे रही, इस का इलाज ना हो पाना दर्द देता है।