भोपाल। शोर इतना बढ़ चुका है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने सुनना कम कर दिया है। वजह, एक बात दूसरे को समझाने के लिए दो-दो बार बोलना पड़ता है क्योंकि सामने वाले को एक बार में सुनाई नहीं देता। गाडि़यों की रेलमपेल और प्रेशर हॉर्न ने ध्वनि प्रदूषण को इस स्तर पर पहुंचा दिया है। करोंद, अरेरा कॉलोनी, हमीदिया रोड व पुराने शहर के अधिकतर हिस्से में शोर की स्थिति तय मानक से ज्यादा रिकॉर्ड हुई है। इतना ही नहीं साइलेंस जोन में शुमार अस्पतालों के आसपास के क्षेत्र में भी यही हालात हैं, दिन और रात दोनों समय यहां मानक से अधिकर शोर रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हर महीने की जाने वाली रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है।