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FACT: कम सुनने लगे हैं भोपाली, इन इलाकों में सबसे ज्यादा POLLUTION

इतना ही नहीं साइलेंस जोन में शुमार अस्पतालों के आसपास के क्षेत्र में भी यही हालात हैं, दिन और रात दोनों समय यहां मानक से अधिकर शोर रहता है।

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Anwar Khan

Sep 23, 2016

Noise pollution

Noise pollution

भोपाल। शोर इतना बढ़ चुका है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने सुनना कम कर दिया है। वजह, एक बात दूसरे को समझाने के लिए दो-दो बार बोलना पड़ता है क्योंकि सामने वाले को एक बार में सुनाई नहीं देता। गाडि़यों की रेलमपेल और प्रेशर हॉर्न ने ध्वनि प्रदूषण को इस स्तर पर पहुंचा दिया है। करोंद, अरेरा कॉलोनी, हमीदिया रोड व पुराने शहर के अधिकतर हिस्से में शोर की स्थिति तय मानक से ज्यादा रिकॉर्ड हुई है। इतना ही नहीं साइलेंस जोन में शुमार अस्पतालों के आसपास के क्षेत्र में भी यही हालात हैं, दिन और रात दोनों समय यहां मानक से अधिकर शोर रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हर महीने की जाने वाली रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है।




फाइलों में दबकर रह जाती है रिपोर्ट
पीसीबी हर महीने यह मॉनिटरिंग रिपोर्ट कलेक्ट्रेट, पुलिस और आरटीओ को भेजता है लेकिन यह तीनों विभाग इस रिपोर्ट को अपनी फाइलों में कैद करके रख देते हैं। नतीजा यह है कि शहर में धड़ल्ले से प्रेशर हॉर्न लगाकर चल रही बसें, बाइक में लगे ओपन सायलेंसर, थ्री व्हीलर में लगे मॉडिफाईड सायलेंसर लोगों की सुनने की क्षमता को कम रहे हैं। जेपी हॉस्पिटल के डॉ पीएन जौहरी के मुताबिक ध्वनि का बढ़ा हुआ स्तर सुनने की क्षमता स्थाई व अस्थाई रूप से कम कर देता है।


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शोर के कारण सुनने की क्षमता कमजोर
करोंद क्षेत्र में रहने वाले 28 वर्षीय विजय सिंह को पिछले कुछ समय से सुनने में दिक्कत हो रही थी। चेकअप में पता चला उनकी सुनने की क्षमता कमजोर हो गई है। डॉक्टर ने उन्हें हेडफोन का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी। विजय ने बताया कि वे हेडफोन का इस्तेमाल नहीं करते। बाद में सामने आया कि विजय की दुकान करोंद के मुख्य बाजार में है। वाहनों की धमाचौकड़ी और हॉर्न से होने वाला प्रदूषण इसका कारण है।


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