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मध्यप्रदेश में बीजेपी नेताओं के बेटों की एक साथ हो रही है राजनीति में लॉन्चिंग

मध्यप्रदेश बीजेपी के नेता राजनीति में अपनी अगली पीढ़ी को एक्टिव करने में जुटे

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भोपाल/ मध्यप्रदेश में पंद्रह साल बाद बीजेपी विपक्ष में है। विपक्ष में रहते हुए मध्यप्रदेश बीजेपी के तमाम नेता अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने की जुगत में लग गए हैं। एक दो नहीं, एक साथ कई बीजेपी नेताओं के बेटों की राजनीति में लॉन्चिंग हो रही है। इसमें शिवराज सिंह चौहान से लेकर नरोत्तम मिश्रा तक के बेटे शामिल हैं। ये सभी लोग भाजयुमो के सदस्य हैं और अब कमलनाथ की सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष में रहकर नेता पुत्रों की पॉलिटिक्ल लॉन्चिंग को लेकर एक रणनीति बनाई है। इसके तहत पूरे प्रदेश में भाजयुमो आंदोलन करेगी। इसी आंदोलन के जरिए एक्टिव पॉलिटिक्स में नेताओं के लल्ला की एंट्री होगी। इसे लेकर भोपाल स्थित बीजेपी मुख्यालय में आंदोलन समिति की बैठक हुई। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सभी नेता पुत्र शामिल हुए।

सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। इसके मुखिया कमलनाथ है। भाजयुमो की बैठक में कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन को लेकर रणनीति तैयार हुई। इस हैंडल करने की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश बीजेपी के दिग्गज नेताओं के पुत्रों को दी गई है।

इन नेताओं के बेटों की हो रही लॉन्चिंग
इस लिस्ट में जिन नेता पुत्रों के नाम हैं, उनमें पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान, सांसद प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा, नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेेंद्र प्रताप सिंह तोमर, पूर्व मंत्री गौरी शंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार, नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा, दीपक जोशी के बेटे जयवर्धन जोशी, अर्चना चिटनीस के बेटे समर्थ चिटनीस, सांसद नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह चौहान, पूर्व विधायक चारा चंद्र बावरिया के बेटे सौरव बावरिया शामिल हैं।

भाजयुमो के इस आंदोलन समिति में कुल 31 सदस्य हैं, जिनमें दस नेता पुत्र हैं। ऐसे में कांग्रेस बीजेपी पर एक बार फिर से हमलावर हो गई है। साथ ही बीजेपी पर वंशवाद को लेकर निशाना साधा है। क्योंकि बीजेपी गांधी परिवार को लेकर कांग्रेस को घेरती रही है।

संघर्ष कर आगे बढ़ेंगे
बीजेपी नेताओं ने अपने बेटों की राजनीति में भाजयुमो के जरिए एंट्री करवा रहे हैं। साथ ही पहले आंदोलन में लाठी-डंडे खाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं लोगों पर होगी। आगे चलकर जब ये अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालेंगे तो कहने के लिए शायद यह तर्क होगा कि इनकी एयर ड्रॉपिंग नहीं हुई है। इन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष किया है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने बैठक में सुझाव दिया कि सीएम आवास का घेराव कर घंटानाद अभियान की शुरुआत की जाए।