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बैरागढ़ के बोरवन, बेहटा के तालाब किनारे ग्रीन स्पेस को आवासीय कर अवैध निर्माण को वैध करने की राह खोली

बैरागढ़ के बोरवन, बेहटा के तालाब किनारे ग्रीन स्पेस को आवासीय कर अवैध निर्माण को वैध करने की राह खोली

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बैरागढ़ के बोरवन, बेहटा के तालाब किनारे ग्रीन स्पेस को आवासीय कर अवैध निर्माण को वैध करने की राह खोली

बैरागढ़ के बोरवन, बेहटा के तालाब किनारे ग्रीन स्पेस को आवासीय कर अवैध निर्माण को वैध करने की राह खोली

भोपाल मास्टर प्लान 2031 ड्राफ्ट

भोपाल।
भोपाल मास्टर प्लान 2031 के ड्राफ्ट में बैरागढ़ की तरफ बोरवन, बेहटा से लेकर तालाब किनारे भैंसाखेड़ी, बैरागढ़ कलां और संबंधित क्षेत्र के ग्रीन स्पेस में हुए अतिक्रमण, अवैध निर्माण को वैध करने की राह खोल दी है। 2005 के प्लान में तालाब किनारे बोरवन एक बड़ा हरा भरा क्षेत्र बताया गया था, इसके बाद बेहटा, भैंसाखेड़ी, बैरागढ़ कलां और आगे तक बड़ा ग्रीन एरिया तय था। नए प्लान के नक्शे में ही देखें तो पता चलता है कि इसमें से 70 फीसदी ग्रीन क्षेत्र कम कर दिया गया है।

दरअसल बीते सालों में निगम व जिला प्रशासन की अनदेखी की वजह से लोगों ने इसी ग्रीन बेल्ट पर कब्जा किया और निर्माण कर दिया। जिस जगह पर भोजवेट लैंड प्रोजेक्ट के तहत पौधरोपण किया गया था, वहां मकान, दुकानें बन गई। शहर के जागरूक लोगों ने इसकी शिकायतें भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। लगातार कब्जों से ग्रीन एरिया आवासीय व व्यवसायिक गतिविधियों का क्षेत्र बन गया। मास्टर प्लान में इस क्षेत्र को संरक्षित करने के प्रावधान करते हुए अवैध कब्जों को हटाने की अनुशंसा होना थी, लेकिन इसके उलट ग्रीन स्पेस ही खत्म करते हुए यहां के अवैध निर्माण को वैध करने का रास्ता खोल दिया गया।
गौरतलब है कि हलालपुर की और तालाब किनारे आमोद प्रमोद के नाम पर विकसित हुए मैरिज गार्डन तो दिक्कत बढ़ा ही रहे हैं, अब ग्रीन स्पेस को खत्म तालाब किनारे आवासीय व व्यवसायिक गतिविधियां बढऩे से तालाब में दिक्कत बढ़ेगी। पर्यावरणविद् डॉ. विनोद पाराशर का कहना है कि फिलहाल अवैध होने के बावजूद काफी गतिविधि है, अब यहां लैंडयूज ही आवासीय, व्यवसायिक हो गया तो इनमें कई गुना अधिक तेजी आएगी और तालाब का बफर जोन बचेगा ही नहीं।