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भोपाल में मेट्रो की पटरियों पर दौड़ा 750 डीसी का करंट

भोपाल में मेट्रो ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। आज हमारी मेट्रो डेढ़ किलोमीटर तक चलेगी। मेट्रो ट्रेन को सेफ्टी ट्रायल के लिए तैयार कर दिया गया है। इसके लिए डिपो की पटरियों में थर्ड रेल सिस्टम के तहत 750 डीसी करंट भी छोड़ दिया है।

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भोपाल में मेट्रो ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार

भोपाल में मेट्रो ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। आज हमारी मेट्रो डेढ़ किलोमीटर तक चलेगी। मेट्रो ट्रेन को सेफ्टी ट्रायल के लिए तैयार कर दिया गया है। इसके लिए डिपो की पटरियों में थर्ड रेल सिस्टम के तहत 750 डीसी करंट भी छोड़ दिया है।

वैसे भोपाल मेट्रो ड्राइवरलेस है लेकिन सेफ्टी ट्रायल में इसे ड्राइवर के साथ जीओए-2 तकनीक से चलाया जाएगा। 750 डीसी करंट वाली पटरियों पर मेट्रो डेढ़ किलोमीटर तक दौड़ेगी। डिपो की पटरियों में करंट चार्ज कर दिया गया है। सोमवार को रैंप व स्टेशन की पटरियों को भी चार्ज कर दिया जाएगा।

पटरियों में 750 डीसी करंट ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे सामान्य ट्रेनें पटरियों के उपर बिजली लाइन ओएचई लाइन से पैंटोग्राफ लगाकर करंट लेती है। पटरियों से मेट्रो का इंजन करंट लेगा और दौड़ेगा। सोमवार को डिपो में मेट्रो पहली बार खुद रनिंग करेगी। यहां सफलता मिली तो इसी दिन सुभाष स्टेशन व रानीकमलापति तक की दूरी भी तय की जा सकती है।

पटरी पर गड़बड़ तो खुद रुक जाएगी ट्रेन
विश्वस्तरीय तकनीकी पर आधारित भोपाल की ऑरेंज मेट्रो पूरी तरह से ऑटोमैटिक है। पटरी पर किसी भी तरह की बाधा या दिक्कत महसूस होने पर ट्रेन खुद ही रुक जाएगी। यानी मेट्रो से दुर्घटना की आशंका जीरो तय की गई है।

मेट्रो ड्राइवरलेस है, जीओए तकनीकी से खुद चलेगी:
भोपाल की ऑरेंज मेट्रो जीओए-4 तकनीकी आधारित है यानि ये ड्राइवरलेस है। शुरुआत में इसे ड्रायवर के साथ जीओए-2 तकनीक से चलाया जाएगा, कुछ समय बाद पूरी तरह से ऑटोमेटेड कर दिया जाएगा।

ऑरेंज मेट्रो को ऐसे किया असेंबल
तीन कोच को अनलोड करने के बाद इनकी कपलिंग की गई यानि कोच को आपस में जोड़ा गया। इसके बाद कई तरह के कनेक्शन से असेंबलिंग की कई। असेंबलिंग करने के बाद कोच में इंस्टॉलेशन का काम शुरू किया, जिसमें एसी से लेकर ऑटोमैटिक सिस्टम के डोर, एलइडी पैनल, इमर्जेंसी बटन, अलार्म सिस्टम, पैंसेंजर कम्यूनिकेशन सिस्टम, एंटी बैक्टीरियल सिस्टम, एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम को इंस्टॉल किए। ऑटोमेटिक मोड के लिए सॉफ्टवेयर डाले गए ताकि ये खुद ही कमांड देकर काम कर सकें।

इधर सडक के एक कोने में बने मेट्रो स्टेशन में पहुंचने के लिए एफओबी यानि फुटओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। सुभाष स्टेशन पर ब्रिज तैयार है, जबकि बोर्ड ऑफिस, एमपी नगर, रानी कमलापति पर इसके लिए काम किया जा रहा है।