13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक-दूसरे की मदद से जिंदगियां बचाईं, अब बर्बाद गृहस्थी देख भर आईं आंखें

पत्रिका टीम. पहले मेघों की बेरुखी देख बारिश के लिए तमाम जतन किए गए, पर दो अगस्त के बाद ग्वालियर चंबल क्षेत्र में हुई लगातार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि सैकड़ों परिवारों की गृहस्थी पूरी तरह उजाड़ कर रख दी। बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। ऐसे में बाढ़ पीडि़त वापस घरों का रुख कर रहे हैं। यहां बर्बादियों के निशां देख उनकी आंखों के सामने वर्तमान और भविष्य की चिंता साफ नजर आ रही है।

less than 1 minute read
Google source verification
एक-दूसरे की मदद से जिंदगियां बचाईं, अब बर्बाद गृहस्थी देख भर आईं आंखें

एक-दूसरे की मदद से जिंदगियां बचाईं, अब बर्बाद गृहस्थी देख भर आईं आंखें

जावदेश्वर गांव के रास्ते ने बचाई कई जिंदगी
श्योपुर. मानपुर क्षेत्र के मेवाड़ा, कोटरा, शंकरपुर समेत कई गांवों में बाढ़ से हुई तबाही के निशान नौ दिन बाद भी ग्रामीणों को डरा रहे हैं। दो अगस्त को आई बाढ़ से सुबह चार बजे सीप नदी का पानी घुसने लगा। देखते ही देखते घुटने तक पानी पहुंच गया। मेवाड़ा गांव को पानी ने दोनों ओर से घेर लिया। ऐसे में यहां से बचकर निकलने के दो रास्ते बंद थे। ग्रामीण जावदेश्वर गांव के रास्ते की तरफ भागे। रास्ता खुला होने से 1200 ग्रामीण सुरक्षित स्थान तक पहुंच सके। ग्रामीणों के मुताबिक ये रास्ता नहीं होता तो जान बचाना मुश्किल होता। वापस आए तो तबाही देख सभी की आंखें भर आईं।
अंबाह: 400 घरों की बस्ती में डूब गए थे आधे मकान
अंबाह (मुरैना). बाढ़ का पानी कम होने से चंबल किनारे बस कछपुरा गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। अब परेशानियां दूसरी हैं। कछपुरा के निवासियों को तीन साल में दूसरी बार बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी है। इस बार आई बाढ़ से अधिकतर घर डूब गए थे, जिससे गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया। अब पीडि़तों के सामने भविष्य की चिंता है। बाढ़ पीडि़त तिरपाल से आड़ कर सडक़ किनारे रहने को मजबूर हैं। खेती केअलावा ग्रामीण मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। बाढ़ से फसलें बर्बाद हो गई हैं।