
नशे के सौदागरों के लिए मुफीद बना मप्र, ओडिशा से विंध्य और उप्र में तस्करी
भोपाल. शांति का टापू कहा जाने वाला मध्यप्रदेश अब नशे के सौदागरों के लिए मुफीद बनता जा रहा है। मप्र के अलग-अलग शहरों में मादक पदार्थ खपाने के साथ ही यहां से इसकी तस्करी दो अलग-अलग रूट से उप्र समेत अन्य राज्यों में की जा रही है। ओडिशा, तेलंगाना समेत पश्चिम बंगाल के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से गांजा शहडोल, अनूपपूर के रास्ते विंध्य और इसके बाद उप्र बड़ी मात्रा में भेजा जाता है। इसके अलावा तस्करों ने ओडिशा से छत्तीसगढ़ से होते हुए महाराष्ट्र से आगरा-मुंबई राजमार्ग से होते हुए मप्र के चंबल क्षेत्र से होते हुए उप्र के रूट का इस्तेमाल भी किया जाता है। जानकारी के मुताबिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गांजे की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। ाहडोल पुलिस ने ही पांच साल में तस्करों के खिलाफ 110 कार्रवाई की हैं। तस्करों से 3200 किलो गांजा बरामद किया गया। सूत्रों के मुताबिक तस्करों के सरगना ओडिशा से बॉर्डर पार कराने का जिम्मा लेते हैं। नक्सली गांजे की काली कमाई से हथियार खरीदते हैं। पुख्ता सूचना मिलने पर शहडोल पुलिस ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए पहुंची, पर खाली हाथ लौटना पड़ा।
केमिकल ड्रग्स की बढ़ी तस्करी
मप्र पुलिस की नारकोटिक्स शाखा से प्राप्त तस्करी के आंकड़ों के मुताबिक कैमिकल ड्रग्स की बरामदगी के मामले इस साल बढ़े हैं। जनवरी 2021 से मई 2021 तक प्रदेशभर में 98 प्रकरण दर्ज हुए और 170 आरोपियों को गिरफ्त में लिया गया। इनसे 86805 नग कैमिकल ड्रग बरामद हुआ। इसी दरमियान गांजे की तस्करी के 915 केस सामने आए और 1141 आरोपियों से 6257 किलो गांजा बरामद किया गया। अफीम की अवैध पौधे उगाने के चार मामले सामने आए और 11 आरोपियों से 13343 पौधे जब्त किए गए।
साल दर साल बढ़े तस्करी के मामले
वर्ष 2018 से 2020 (मई तक) तक मादक पदार्थों की तस्करी के मामले साल-दर साल बढृे हैं। वर्ष 2018 तस्करी के 1922 केस दर्ज कर 2558 आरोपी तो वर्ष 2019 में 3474 केस दर्ज हुए और 4318 आरोपी पकड़े गए। वर्ष 2019 में केसों की संख्या 3066 पहुंची और 3982 आरोपी गिरफ्त में आए। इधर इस साल मई महीने तक 1264 केस दर्ज कर 1673 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
Published on:
29 Sept 2021 10:46 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
