
मातृभाषा और गणित की बुनियादी शिक्षा में ‘निपुण’ बनाने की कवायद
भोपाल. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरुआती कक्षा यानी कक्षा तीन के बच्चों को मातृभाषा और गणित की बुनियादी शिक्षा में पारंगत बनाने की कवायद स्कूल शिक्षा विभाग ने शुरू की है। इसमें कक्षा तीन तक के बच्चों में मातृभाषा (हिन्दी) को पढऩे-लिखने के साथ ही गणित की मूलभूत समझ विकसित करना है। इसके लिए शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके लिए 13 विषयवार 13 मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनके जरिये बच्चों को इन दोनों विषयों में पढ़ाने के गुर सिखाए जाते हैं। गौरतलब है कि एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसइआर) के मुताबिक देशभर में कक्षा तीन और पांचवीं के अधिकतर बच्चे न तो धाराप्रवाह पढऩे में सक्षम हैं और न ही गणित के सामान्य सवाल हल कर पाते हैं। नेशनल इनिशिएटिव फॉर प्रोफिसिएंसी इन रीडिंग विथ अंडरस्टेंडिंग एंड न्यूमेरेसी (निपुण) के जरिये बच्चों को इतना सक्षम बनाया जाएगा कि वे पढऩे-लिखने के अलावा गणित के शुरुआती सवालों को हल कर सकें। निपुण अभियान का उद्देश्य वर्ष 2026 तक कक्षा तीन तक के प्रत्येक बच्चे भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करना है।
ये लक्ष्य करना है हासिल
बच्चे एक मिनट में 60 शब्द आसानी से धाराप्रवाह पढ़ सकें।
गणित में तीन अंकों की संख्या की पहचान करने में सक्षम हों।
गणित के दो अंकों का जोड़, घटना और गुणा-भाग कर सकें।
निपुण भारत अभियान के तहत कक्षा तीन के बच्चों को मातृभाषा और गणित के बुनियादी शिक्षा मुहैया कराना है। इसके लिए शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है।
लोकेश कुमार जांगिड़, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र
Published on:
19 Oct 2021 11:00 pm
