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बैंक से 29.41 करोड़ की धोखाधड़ी: पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के खिलाफ सीबीआइ ने दर्ज की एफआइआर

-बैंक लोन नहीं चुकाने और राशि का दुरुपयोग करने का आरोप-पटवा ऑटोमोटिव प्रालि. पर कसा शिकंजा, नियम विरुद्ध बनाई दूसरी कंपनी

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बैंक से 29.41 करोड़  की धोखाधड़ी: पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के खिलाफ सीबीआइ ने दर्ज की एफआइआर

बैंक से 29.41 करोड़ की धोखाधड़ी: पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के खिलाफ सीबीआइ ने दर्ज की एफआइआर

भोपाल. प्रदेश में इंदौर समेत अन्य शहरों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कार्यरत मेसर्स पटवा ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ सीबीआई ने गुरुवार को एफआइआर दर्ज की। बैंक ऑफ बड़ौदा के इंदौर रीजन के डिप्टी जनरल मैनेजर राजेश डी शर्मा ने 21 सितंबर 2021 को सीबीआइ से शिकायत की थी कि पटवा ऑटोमोटिव और उसके डायरेक्टर पूर्व मंत्री और मौजूदा भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी मोनिका पटवा ने बैंक से लिया गया लोन नहीं चुकाया और बैंक प्रबंधन को बताए बगैर ये राशि को अन्य बैंकों की खातों में ट्रांसफर किया गया। सीबीआइ टीम ने कंपनी के इंदौर और भोपाल स्थित कार्यालयों से दस्तावेज भी जब्त किए हैं। बैंक द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि कंपनी के डायरेक्टरों ने वर्ष 2014 से 2017 के बीच धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इन्होंने आइडीबीआई बैंक से लिए गए लोन के अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा की इंडस्ट्रियल स्टेट ब्रांच, इंदौर से 36 करोड़ रुपए की राशि ली। बैंक ऑफ बड़ौदा का यह खाता मई 2017 में एनपीए घोषित कर दिया गया। इस पूरे मामले की जांच के बाद सीबीआइ ने 29.41 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में पटवा ऑटोमोटिव प्रालि और उसके डायरेक्टर सुरेंद्र पटवा, मोनिका पटवा के खिलाफ केस दर्ज किया है। बैंक द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2014 में लिए गए 36 करोड़ रुपए के लोन में सुरेंद्र पटवा और मोनिका पटवा के अलावा भरत पटवा, महेंद्र पटवा और फूल कुंवर पटवा की और से पर्सनल गांरटी दी गई थी।
नियम विरुद्ध कंपनी का नाम भी बदला
बैंक द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि पटवा ऑटोमोटिव कंपनी का इंदौर के अलावा मंदसौर, रतलाम, नीमच समेत अन्य शहरों में भी कारोबार संचालित होता है। ये कंपनी वर्ष 1997 में बनी थी और ग्वालियर में रजिस्र्ड है। इस कंपनी ने इंदौर में वर्श 2011 से चार पहिया वाहनों की डीलरशिप से कारोबार शुरू किया। लोन की रकम वापस लेने के लिए बैंक द्वारा नोटिस जारी किए गए पर वसूली नहीं हुई। बैंक ने कोर्ट से कार्रवाई के लिए कार्रवाई आगे बढ़ाई तो पता चला कि कंपनी का नाम मेसर्स पटवा ऑटोमोटिव से बदलकर मेसर्स भगवती पटवा ऑटोमोटिव कर दिया गया है, जिसकी अनुमति नहीं ली गई थी।


बैलेंस शीट में गड़बड़ी, दूसरे खातों में भेजे रुपए
शिकायत में कहा गया है कि बैंक से जिस प्रयोजन के लिए राशि ली गई थी, उसकी बजाय अन्य कामों में इसका उपयोग किया गया। बैंक प्रबंधन द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ कि पटवा ऑटोमोटिव कंपनी ने 20.45 करोड़ रुपए पटवा अभिकरण, रतलाम के खाते में ट्रांसफर किए थे। बैलेंस शीट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।