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अब मोटे अनाज का आटा और उत्पाद लंबे समय तक रख सकेंगे सुरक्षित

-इंस्टेंट खाद्य उत्पाद मसलन खीर, हलुआ, पोहा और नूडल्स भी होंगे तैयार-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल ने तैयार की विशेष यूनिट

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अब मोटे अनाज का आटा और उत्पाद लंबे समय तक रख सकेंगे सुरक्षित

अब मोटे अनाज का आटा और उत्पाद लंबे समय तक रख सकेंगे सुरक्षित

भोपाल. अन्य खाद्यान्न मसलन चावल, गेहूं की तुलना में जल्द खराब होने वाला मोटा अनाज (मिलेट) यानी ज्वार, बाजारा, कोदो कुदकी के उत्पादों को अब पहले की तुलना में दोगुना अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। राजधानी स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने फर्मनटेशन (किणवन) आधारित यूनिट तैयार की है। इससे न केवल मोटे अनाज की उम्र को बढ़ाने में सफलता हासिल हुई है, बल्कि अधिक समय तक रखने के कारण इसमें आने वाली कड़वाहट को भी दूर किया है। इसके अलावा मोटे अनाज से रेडी टू ईट आधारित खाद्य पदार्थ इंस्टेंट हलुआ, खीर, पोहा और नूडल्स भी तैयार हो सकेंगे। यहां बता दें कि इस यूनिट को 15 लाख रुपए में लगाया जा सकता है। कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा इस तकनीक को मैनुफेक्चिरंग यूनिट समेत उद्यमियों से साझा किया जाएगा, ताकि मोटे अनाज के उत्पादों को लोगों तक पहुंचाया जा सके।

इस तकनीक से बढ़ाई उत्पादों की मियाद और स्वाद
भारतीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के निदेशक डॉ. सीआर मेहता बताते हैं कि संस्थान द्वारा मोटे अनाज के उत्पादों की मियाद और स्वाद बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट तैयार की है। इसमें एक फरर्मेटेड स्टीमिंग यूनिट, न्यूमेटिक कन्वेनर, ड्रायर मशीन, फ्लेक्स कन्वेनर और रिएक्टेंस विंडो शामिल की है। इस यूनिट से एक बैच में प्रति दिन 25 किलो मोटे अनाज के उत्पाद मिलते हैं। इस तकनीक से फर्मंटेड ज्वार, बाजरा और कोदो-कुदकी के आटे के साथ ही इंस्टेंट कोदो-कुदकी खीर, कोदो हलुआ, ज्वार-उपमा मिश्रण और मसाला ज्वार उत्पाद मिलते हैं।
छह महीने तक बढ़ सकेगी भंडारण क्षमता
यूनिट से फर्मंटेड मोटे अनाज से बने उत्पादों को छह महीने तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। संस्थान के प्रिसिपल साइंटिस्ट डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी के मुताबिक इस यूनिट से प्रोसेस किए गए ज्वार के आटे को सौ माइक्रोन के पाउच में पैक किया जाए तो इसकी भंडारण क्षमता 20 दिनों की तुलना में 45 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह बाजरे के आटे की भंडारण मियाद भी दोगुनी होगी। कोदो खीर मिक्स और हलुआ मिक्स को छह महीने तक और ज्वार के उममा मिक्स और मसाला ज्वार को तीन महीने तक भंडारित कर सकेंगे। गौरतलब है कि डॉ. त्रिपाठी की ‘मिलेट तथा मिलेट प्रौद्योगिकी’ के संबंध में कई शोध पत्रों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशन हुआ है।