
शहर में बंगाल की विशेष चिकनी मिट्टी से बन रही हैं देवी सरस्वती की प्रतिमाएं
एक मूर्ति बनने में 20 से 25 दिन का समय
इ न प्रतिमाओं को बनाने में कई दिन लगते हैं। पहले लकड़ी से ढांचा खड़ा किया जाता है। फिर इस पर घास-फूंस, सुतली और लोकल मिट्टी से लेप किया जाता है। बाद में बंगाल की विशेष मिट्टी से इसे फाइनल फिनिशिंग दी जाती है। बंगाल की मिट्टी चिकनी होती है। प्रतिमा पर इसका लेप चढ़ाने के सूखने के बाद भी इसमें दरार नहीं आती। मिट्टी सूखने के बाद इस पर कपड़ा चढ़ाया जाता है और वॉटर कलर से फिर इसे रंगते हैं। आखिरी में मूर्ति को गहने से सजाते हैं।
मूर्तिकार मोहनलाल प्रजापति ने बताया कि कोई वीणाधारी देवी बनवाते हैं तो कुछ कमल के सिंहासन पर विराजमान प्रतिमाएं बनवाते हैं। मूर्तियों में मां को भव्य रूप देने के लिए हंस, कमल, शंख, चक्र, रथ, वीणा, पुस्तक आदि के साथ बनाया जा रहा है। अब लोगों की नटराज मूर्ति और पहाड़ पर विराजमान देवी की डिमांड भी काफी बढ़ गई है।
Published on:
24 Jan 2023 07:27 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
