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इस समस्या का दस साल में नहीं हो सका समाधान

मुख्य सड़कों पर शाम होते ही लग जाता है आवारा पशुओं का जमावड़ा, सालाना 20 लाख खर्च, फिर भी मवेशी सड़क पर
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इस समस्या का दस साल में नहीं हो सका समाधान

भोपाल/कोलार। राजधानी भोपाल की सड़क पर आवारा पशुओं ने कब्जा जमा लिया है। नगर निगम के सामने आवारा पशु इतनी बड़ी चुनौती बन गए हैं कि अफसर चाहकर भी इन शहर से बाहर नहीं कर पा रहे हैं। शहर की सड़कों पर आवारा पशु धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं। बीच सड़क पर रात-दिन डेरा जमाए इन पशुओं की जोर आजमाइश से कई बार हादसे हो चुके हैं।

आवारा पशुओं की पटकनी और टक्कर से कोलार के कई लोग हाथ-पैर तक टुड़वा चुके हैं। नगर निगम की अनदेखी से शहर की सड़कों पर आवारा पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे। निगम के आकड़ों के मुताबिक शहर की सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा आवारा पशु धूम रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़ा नहीं जा रहा है। निगम अमला साल भर की मशक्कत के बाद महज दो हजार मवेशियों को शहर से बाहर का रास्ता दिखा पाया है। यह स्थिति तब है, जब निगम के आवारा मवेशी पकडऩे के नाम पर अच्छा खासा बजट खर्च कर चुका है। राजधानी में हर साल नगर निगम पशुओं को पकडऩे पर करीब २० लाख रुपए खर्च करता है। फिर भी शहर की मुख्य सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है।

दूध निकालने के बाद पालक छोड़ देते हैं पशु
शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या कम नहीं होने का मुख्य कारण डेरियां हैं। दूध निकालने के बाद पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। निगम अमला भी जहां-तहां कार्रवाई कर अपना कालम पूरा कर लेता है।

खास-खास
- शहर में 10 हजार से ज्यादा आवारा पशु
- सात कांजी हाउस भोपाल शहर में
- कोलार में कांजी हाउस की बहुत जरूरत
- 01 नगर निगम की गौशाला
- 35 आदमी का अमलना भोपाल नगर निगम के पास
- 02 हजार पशु पकड़े गए एक साल में
- पशु पकडऩे पर 20 लाख रुपए सालाना खर्च करता है नगर निगम

- ननि की टीम आवारा पशुओं को पकड़ रही है। डेरियों के कारण शहर में आवारा पशुओं की संख्या ज्यादा है। इन्हें शिफ्ट किया जा रहा है।
राजीव सक्सेना, गौवर्धन परियोजना अधिकारी