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Article 370: ‘अब मुझे कानूनी रूप से जम्मू-कश्मीर में दामाद का दर्जा मिल जाएगा’

Article 370: जानिए, धारा 370 के खत्म होने के बाद भोपाल के प्रफुल्ल मंडलोई का परिवार क्यों है खुश

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 Jammu and Kashmir

भोपाल . धारा 370 ( Article 370 ) के खत्म होने से हिंदुस्तान में खुशी का माहौल है। सियासतदान इस पर अपनी सियासी रोटियां सेंकने में लगे हैं। लेकिन कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिन्हें अब मोदी सरकार के फैसले से वो अधिकार मिल गए हैं, जिससे वो धारा 370 की वजह से वंजित थे। वैसे ही परिवारों में से एक हैं, भोपाल के रहने वाले प्रफुल्ल मंडलोई ( prafull mandloi ) । प्रफुल्ल एक निजी बैंक में अधिकारी हैं, उनकी पत्नी जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हैं। प्रफुल्ल से शादी के बाद से ही उनकी पत्नी वहां की सारी सुविधाओं से महरूम हो गई थीं।

केंद्र सरकार के फैसले के बाद प्रफ्फुल मंडलोई खुश हैं। उनका क्या कहना है, ये आपको आगे बताएंगे। लेकिन पहले ये जान लीजिए दोनों की शादी कैसे हुई। प्रफुल्ल की पत्नी का नाम मिनाक्षी है। दोनों की दोस्ती 2001 में इंटरनेट के जरिए हुई थी। फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गया। दोनों ने पुणे के इंदिरा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए किया है। पढ़ाई के दौरान ये रिश्ता और मजबूत हुआ।

जम्मू की रहने वाली हैं मिनाक्षी
मिनाक्षी मंडलोई जम्मू की रहने वाली हैं। मिनाक्षी और प्रफुल्ल मंडलोई अच्छी तरह से जानते थे कि शादी के बाद जम्मू-कश्मीर की नागरिकता छिन जाएगी। फिर भी दोनों की सगाई 2004 में हुई। उसके बाद 2007 में दोनों की धूमधाम से शादी हुई। अब दोनों पिछले बारह साल से खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। शादी के बाद ससुराल आना जाना लगा रहा लेकिन मिनाक्षी और उनके पति वहां न तो कुछ खरीद सकते थे और न ही वहां कुछ व्यवसाय कर सकते थे।

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लाहौर से आए थे ससुर
पत्रिका से बातचीत करते हुए प्रफुल्ल मंडलोई ने कहा कि हमारे ससुर बंटवारे के वक्त लाहौर से आकर जम्मू में बसे थे। वे संघ से जुड़े हुए हैं। वहीं, उनकी पत्नी मिनाक्षी मंडलोई के भाई लोग लद्दाख में रहते हैं। प्रफुल्ल कहते हैं कि साल में हमलोग जरूर एक बार जम्मू-कश्मीर जाते हैं। लेकिन उन्हें खुशी इस बात की है कि शादी के बाद कानूनी रूप से वे वहां के कुछ नहीं थे। लेकिन धारा 370 हटने के बाद उन्हें अब कानूनी रूप से दामाद का दर्जा मिल जाएगा।

शादी के वक्त ही मिल गया था एनओसी
प्रफुल्ल मंडलोई ने कहा कि उन्हें शादी के वक्त ही जिला प्रशासन की तरफ से एक एनओसी मिल गया था कि अब आप यहां के नागरिक नहीं रहे। इस एनओसी के मिलने के बाद प्रफुल्ल की पत्नी का भी कोई हक पैतृक प्रॉपर्टी पर नहीं था। अब सरकार के इस फैसले वे बहुत खुश हैं। प्रफुल्ल कहते हैं कि हमें लीगली दामाद का दर्जा मिल गया। साथ ही अगर मैं सोचूं तो वहां कोई प्रॉपर्टी भी ले सकता हूं। प्रफुल्ल मंडलोई के दो बच्चे भी हैं। उन्होंने अपने परिवार की कुछ तस्वीरें पत्रिका के साथ शेयर की हैं।

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पाकिस्तानी को मिलती हैं सारी सुविधाएं
इसके साथ ही प्रफुल्ल मंडलोई बताते हैं कि अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की पाकिस्तान के लड़के से शादी करती है। तो उसके लिए नियम बिल्कुल उल्ट है। उसे संवैधानिक रूप से मान्यता भी है। साथ में उस लड़के को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है। वो जम्मू-कश्मीर में घर-मकान खरीद सकता है।