
भोपाल@उमा प्रजापति
राजधानी में 10 कॉलेजों के यूनिवर्सिटी में तब्दील होने से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
निजी यूनिवर्सिटी की संख्या बढ़ने के कारण आरजीपीवी को हर साल करीब एक करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। ऐसे में इन कॉलेजों की ब्रांच भी अब इन्हीं के अधीन काम कर रही हैं। यह भी माना जा रहा है कि कॉलेजों के निजी यूनिवर्सिटी के रूप में परिवर्तित होने से सरकार का भी इन पर नियंत्रण नहीं रहता।
अभी तक जो कॉलेज आरजीपीवी के अधीन थे, अब वे खुद परीक्षा कराने और डिग्री देने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं। पहले इन पर आरजीपीवी का नियंत्रण होता था और आरजीपीवी इन कॉलेजों से संबद्धता शुल्क, परीक्षा शुल्क आदि का लाखों रुपए का राजस्व कमाता था। लेकिन आरजीपीवी ने राजस्व के अन्य स्रोत विकसित नहीं किए इसलिए अब विवि को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। जबकि निजी विवि से छात्रों को लाभ मिल रहा है।
भोपाल में यह कॉलेज बने यूनिविर्सिटी
: मध्यांचल प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (पटेल ग्रुप)
: आरकेडीएफ विश्वविद्यालय
: आईसेक्ट विश्वविद्यालय
: ओरिएंटल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
: सर्वेपल्ली राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी
● एलएलसिटी यूनिवर्सिटी
मानसरोवर ग्लोवल यूनिवर्सिटी
188 से 147 हुई इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या: आरजीवीपी प्रदेश की एक मात्र तकनीकी यूनिवर्सिटी है। ऐसे में सभी सरकारी एवं निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इससे संबद्ध हैं। सन 2017 तक आरजीपीवी में कॉलेजों की संख्या 188 थी, जो अब घटकर 147 रह गई है। 41 कॉलेज इससे बाहर हो गए हैं।
जितनी निजी यूनिवर्सिटी बढ़ती जाएंगी आरजीपीवी को उतना घटा होगा। कॉलेजों की संख्या कम होने से छात्र संख्या भी तेजी से घट रही है। संबद्धता शुल्क के साथ ही परीक्षा शुल्क सहित कई मदों से जो रुपए आते हैं वह रुक जाते हैं। इसका असर विवि की आर्थिक स्थिति पर हो रहा है।
- डॉ. आरएस राजपूत, रजिस्ट्रार, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
Published on:
22 Aug 2022 01:39 pm
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