
kolar dam: भोपाल अपने तालाबों के लिए जाना जाता है। अभी तक यह जलस्रोत केवल जलप्रदाय के काम ही आ रहे हैं। लेकिन थोड़ा प्रयास हो तो यह जलस्रोत बड़ी मात्रा में बिजली के स्रोत भी बन सकते हैं। इन बड़े जलस्रोतों में floating solar panel लगाकर यह संभव हो सकता है। इन जलस्रोतों का इतना विस्तार है कि यहां पर सौ मेगावाट तक सूरज की किरणों से बिजली बन सकती है। इसका एक दूसरा फायदा यह भी होगा कि हर साल लाखों लीटर पानी वाष्प बनकर उडऩे से भी बच जाएगा। ऊर्जा विकास निगम द्वारा खंडवा स्थित ओंकारेश्वर बांध में फ्लोटिंग सोलर इनर्जी का प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है। लेकिन अभी तक भोपाल में कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
दक्षिणी राज्यों में हैदराबाद सहित अन्य स्थानों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल्स का नवाचार सफल रहा है। इसकी मध्य प्रदेश और खासकर राजधानी भोपाल में काफी संभावनाएं हैं क्योंकि भोपाल में ही अकेले 8 बड़े जल स्रोत हैं। भोपाल के आसपास कोलार, केरवा, कलियासोत, हथाईखेड़ा और हलाली डैम हैं। इसके साथ बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा झील भी है। इनके ऊपर तैरते हुए सोलर पैनल लगाकर न सिर्फ बड़ी मात्रा में बिजली बनाई जा सकती है बल्कि हर साल इन जल स्रोतों से भाप बनकर उडऩे वाले लाखों लीटर पानी को भी बचाया जा सकता है। इससे पानी की कमी भी दूर हो सकती है।
इसलिए जरूरी है फ्लोटिंग तकनीक
सोलर इनर्जी का बड़ा प्रोजेक्ट लगाने के लिए अभी बड़ी मात्रा में खाली जमीन की जरूरत होती है। लेकिन अब रहवासी इलाकों के विस्तार के चलते जमीन की काफी कमी होती जा रही है। उद्योगों और बड़े प्रोजेक्ट तक को जमीन आसानी से नहीं मिल पा रही है। लेकिन जलस्रोतों के पानी पर तैरते हुए सोलर पैनल लगाकर जमीन बचाई जा सकती है। अभी कोलार बांध से ही प्रतिदिन पानी सप्लाई करने के लिए बड़ी मोटरें चलाई जाती है इसका सालाना बिल ही 10 करोड़ के ऊपर जाता है। अगर बांध पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगा दिए जाते हैं तो इस बिजली बिल के करोड़ों रूपए बचाए जा सकते हैं।
यह प्रोजेक्ट बने उदाहरण
नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में सिम्हाद्री थर्मल पावर स्टेशन के जलाशय में 75 एकड़ में 1 लाख 10 हजार सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगा कर 25 मेगा वाट का सोलर प्लांट शुरू किया है। इससे 1364 मिलियन लीटर पानी भाप बनकर उडऩे से बच रहा है। जो पानी बच रहा है उसे लगभग 7000 घरों में पेयजल सप्लाई हो रही है। प्लांट से बन रही बिजली से इतने ही घरों को बिजली भी मिल रही है। ऊर्जा विकास निगम द्वारा मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर डैम में सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया है। यह करीब 600 मेगावाट का होगा। विश्व बैंक इसके लिए तकनीकी और आर्थिक मदद दे रहा है।
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भोपाल और उसके आसपास जलस्रोतों में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की भरपूर संभावनाएं हैं। यह तकनीक अभी तेजी से लोकप्रिय हो रही है और भविष्य की मांग भी यही है। इसमें जमीन की जरूरत नहीं होती है। पानी में तैरते पैनल से बिजली भी बनेगी और जलस्रोतों के पानी का वाष्पीकरण भी रूकेगा।
- संयम इंदुरख्या, सोलर इनर्जी एक्सपर्ट
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अभी मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर डैम में सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर इनर्जी प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है। भोपाल के तालाब और आसपास के कोलार आदि डैम में पानी का फ्लक्चुएशन ज्यादा है। इसलिए यहां पर अभी ऐसा कोई प्रोजेक्ट प्रस्तावित नहीं है।
- भुवनेश पटेल, चीफ इंजीनियर मप्र ऊर्जा विकास निगम
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प्रदेश में अभी नवकरणीय ऊर्जा की स्थिति
सोलर एनर्जी -2237 मेगावाट
विंड एनर्जी - 2520 मेगावाट
बायोमास एनर्जी 86 मेगावाट
स्मॉल हाइड्रो प्रोजेक्ट 96 मेगावाट
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भोपाल में सोलर इनर्जी- 60 मेगावाट लगभग
Published on:
10 Mar 2022 09:18 pm
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