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अमेरिका तक है इस भोपाली बटुए की डिमांड, जानिए रोचक FACTS

भोपाल यूं तो कई चीजों के लिए मशहूर है लेकिन जरी जरदोजी से बना भोपाली बटुआ भी यहां की खास पहचान है। 

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Nitesh Tiwari

Jun 14, 2016

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(भोपाली बटुआ)

भोपाल। भोपाल यूं तो कई चीजों के लिए मशहूर है लेकिन जरी जरदोजी से बना भोपाली बटुआ भी यहां की खास पहचान है। करीब सौ साल पुरानी इस कला की मांग मिस्र, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी है। इस जरी जरदोजी के बटुए बनाने वालों का पुश्तैनी इतिहास है। ये लोग इसके अलावा जरी, रेशम, कारपेट, सूट लहंगे और शेरवानी का काम भी करते हैं।




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ऐसे बनता है ये बटुआ
इस बटुए को बनाने का अधिकांश काम हाथ से होता है। इन बटुओं को दक्षिण भारत के शहर चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलूर और पुणे भेजा जाता है। इसके अलावा कुछ कारीगर अपना उत्पाद विदेश में भी निर्यात करते हैं। ये बटुआ अरब देशों और अमेरिका में भी भेजा जाता है। भोपाल में साल भर में लगभग 15 करोड़ रुपये का जरी का काम होता है।



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इसमें से बटुओं के कारोबार का हिस्सा 13 से 15 लाख रुपये है। इसे बनाने में जरी के साथ मोती, रेशम और वायर आदि का उपयोग किया जाता है। मोती के बटुए की कीमत कम होती है। जबकि जरी के साथ रेशमी बटुए कीमती होते हैं। बटुआ निर्माता आसिफ खान कहते हैं, हमारे पास 50 रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक के बटुए उपलब्ध हैं। आसिफ जरी के उत्पादों का निर्यात सऊदी अरब, ब्रिटेन और मिस्र जैसे देशों को करते हैं।

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यहां बनता है
राजधानी में बटुओं का काम करने वाले इमरान खान कहते हैं कि दूसरे शहरों में लगने वाली प्रदर्शनियों में बटुओं की अच्छी मांग रहती है। पुराने शहर में एक बड़ा तबका जरी के बटुए, पर्स, टिकोनी, साड़ी और पर्दों का काम करता है। राजधानी में पॉलिटेक्निक बस्ती, ऐशबाग स्टेडियम, खानूगांव आदि इलाकों में अभी भी बड़े पैमाने पर जरी के बटुए बनाने का काम किया जाता है।