
Congress Leader on Dhirendra Shastri: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़े कांग्रेसी नेता का विवादित बयान सामने आया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री को उचक्का बताया है। उन्होंने कहा कि वो सनातन की बात कहां करते हैं? सनातन धर्म के बारे में उन्हें कुछ पता है ही नहीं। वे जिस प्रकार की भागवत बोल रहे हैं वह बिल्कुल बचकानी है। ऐसे व्यक्ति को बुंदेलखंडी में उचक्का कहा जाता है।
मुकेश नायक ने कहा- ना तो इस बागेश्वर वाले बाबा को रामचरितमानस का ज्ञान है, ना भागवत का ज्ञान है, ना वैदिक परंपराओं का ज्ञान है। वैदिक वांग्मय में ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, स्थापत्य वेद, धनुर्वेद आयुर्वेद, गंधर्ववेद और उसके साथ शिक्षा, व्याकरण, छंद, न्याय, आरण्यक, ब्रह्मण्य, योग्य, दर्शन, कर्म मीमांसा इतने विषय हैं। क्या ज्ञान है? उनको…चिल्लाते भर हैं सनातन धर्म… सनातन धर्म।
वे जिस तरीके से भागवत बोलते हैं वो देखकर मुझे बहुत शर्म आती है कि ये हमारे धर्म ग्रंथो, हमारी ऋषि परंपरा की जो देन है उसका यह मजाक उड़ाते हैं। मजमा लगाकर हजारों लोगों को सामने बिठाकर जिस तरीके से इन ग्रंथों की जिस तरह वो व्याख्या करते हैं। उसे देखकर इन पर हंसी आती है।
आगे मुकेश नायक ने कहा कि अभी प्रयागराज महाकुंभ में लोगों की मृत्यु हो गई उसका उपहास कर रहे थे कि इनको मोक्ष मिलेगा। तुम आ जाओ तुम्हारे पिताजी को धकेल कर मोक्ष दे देते हैं। लोगों की सहायता करने की जगह आप उनका मजाक उड़ा रहे हो। इनको कोई ज्ञान नहीं है। आज के समय में जो धर्म का अंधानुकरण है। ये धर्म के अंधेपन के मूर्त रूप हैं। ये वो लोग हैं जो पर्चे लिखकर छोटी-मोटी सिद्धियों से लोगों की आंखों में धूल झोंकते हैं। ये धार्मिक आस्थाओं का दोहन कर रहे हैं। धर्म को राजनीति का औजार बना कर सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मैं बागेश्वर धाम को चुनौती देता हूं। कि वो मंच लगा लें मैं एक पूर्ण राजनैतिक व्यक्ति नहीं हूं। मौलिक रूप से आध्यात्मिक व्यक्ति हूं। सनातन धर्म संस्कृति और परंपरा से जुड़ा हुआ हूं। मंच लगा लें रामचरित मानस पर, भागवत, गीता पूरे वैदिक वाङ्मय पर जिस विषय पर भी चर्चा करना हो अगर मेरी चर्चा में मेरे प्रश्नों का उन्होंने जवाब दिया तो उसी मंच पर अपना सिर मुंडवाकर मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा, नहीं तो उनको अपना मुंडन करवाना पड़ेगा। राजनीतिक क्षेत्र में जो अध्यात्म की आड़ लेकर बकबक कर रहे हैं, उसको उन्हें छोड़ना पड़ेगा।
Published on:
18 Feb 2025 05:57 pm
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