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भोपाल के बाशिंदों को नहीं मिलेगा लोकल सांसद! जानिये कहां-कहां से उतारे बाहरी उम्मीदवार और क्या कहती है इनकी रिपोर्ट…

जीत के लिए बाहरियों पर भरोसा,प्रदेश में आधे दर्जन से अधिक सीटों पर स्थानीय विरोध के बाद भी बाहरी उम्मीदवारों को मिला टिकट...

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2019 election 2019

भोपाल के बाशिंदों को नहीं मिलेगा लोकल सांसद! जानिये भाजपा और कांग्रेस ने कहां से उतारे बाहरी उम्मीदवार और क्या कहती है इनकी रिपोर्ट...

भोपाल@अरुण तिवारी की रिपोर्ट...

लोकसभा 2019 चुनाव शुरू हो चुके हैं, इसके तहत मध्यप्रदेश में कुल चार चरणों के तहत मतदान होना है, जिनमें से पहले चरण का चुनाव हो चुका है। वहीं मध्यप्रदेश के तीन चरण अभी बाकी हैं। देश में हो रहे इन चुनावों के लिए मध्यप्रदेश में इन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने जीत के लिए बाहरी उम्मीदवारों पर खास भरोसा जताया है।

ऐसे में प्रदेश की 29 सीटों में से आधे दर्जन से अधिक सीटों ऐसी हैं जहां पर स्थानीय विरोध के बाद भी बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। इन आठ सीट में से अकेली भोपाल सीट ऐसी है जहां दोनों दलों ने बाहरी उम्मीदवार उतारा है।

इन्हीं सब के बीच इस बार ये तय हो गया है कि राजधानी भोपाल से जीत किसी की भी हो लेकिन यहां की जनता को सांसद बाहरी ही मिलेगा। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा की प्रज्ञा ठाकुर दोनों भोपाल की सरजमीं से नहीं आते हैं। राजनीतिक परिस्थितियों ने दोनों को चुनाव के जरिए धर्म युद्ध में उलझा दिया है।

भोपाल की तासीर इस तरह की मानी जाती रही है कि बाहरी उम्मीदवार को यहां की जनता ज्यादा पसंद करती है, ऐसे में ये चर्चा भी चल पड़ी है कि कांग्रेस ने ये सीट छीनने के लिए तो भाजपा ने बचाने के लिए बाहरी उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। बाहरी उम्मीदवारों की जीत का प्रतिशत भी प्रदेश में अच्छा है इसलिए पार्टियां उनको टिकट देने में गुरेज नहीं करतीं।

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सीटें: जहां से खड़े हैं बाहरी उम्मीदवार...

1. भोपाल :
यहां पर कांग्रेस-भाजपा के दोनों उम्मीदवार बाहरी हैं। कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को उतारा है जो राजगढ़ से आते हैं। वहीं भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को टिकट दिया है। प्रज्ञा ठाकुर भिंड जिले से आती हैं। भोपाल के इतिहास पर नजर डालें तो 1967 में बाहरी उम्मीदवार जनसंघ के जगन्नाथ राव जोशी ने ये सीट कांग्रेस से छीनी थी। जगन्नाथ राव जोशी को कांग्रेस के बाहरी उम्मीदवार शंकरदयाल शर्मा ने हराया। टीकमगढ़ की उमा भारती भी यहां से सांसद रह चुकी हैं।

2. मुरैना :
इस सीट पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बनाया है। तोमर ग्वालियर जिले से आते हैं। तोमर 2014 में ग्वालियर से सांसद बने थे तो 2009 में मुरैना से लोकसभा चुनाव जीते थे। अब स्थानीय सीट पर संकट आया तो तोमर ने फिर बाहर का रास्ता पकड़ लिया। कांग्रेस उम्मीदवार रामनिवास रावत मुरैना जिले की विजयपुर विधानसीट से ही आते हैं।

3. टीकमगढ़ :
यहां पर भी भाजपा ने बाहरी उम्मीदवार के रुप में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक को मैदान में उतारा है। पिछली बार भी खटीक यहीं से चुनाव जीते थे। खटीक सागर के रहने वाले हैं। सागर सीट जब सामान्य हुई तो टीकमगढ़ को आरक्षित कर दिया गया। खटीक को भी सागर से टीकमगढ़ भेज दिया गया। बाहरी उम्मीदवार के नाते खटीक का यहां पर विरोध भी हुआ। यहां से कांग्रेस ने स्थानीय नेता किरण अहिरवार को उम्मीदवार बनाया है।

4. खजुराहो :
इस सीट पर भी भाजपा ने बाहरी को टिकट दिया है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा ग्वालियर-चंबल के नेता रहे हैं लेकिन संघ के दबाव में भाजपा के लिए सुरक्षित सीट खजुराहो पर उनको भेज दिया गया। वीडी शर्मा के विरोध में यहां के सुर बुलंद भी हुए लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं बदला। पिछली बार भी बाहरी उम्मीदवार नागेंद्र सिंह यहां से चुनाव जीते थे। कांग्रेस ने यहां से कविता सिंह को टिकट दिया है। कविता इसी सीट की स्थानीय निवासी हैं।

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5. दमोह :
यहां पर भाजपा ने नरसिंहपुर जिले के प्रहलाद पटेल को उम्मीदवार बनाया है। प्रहलाद पटेल ने बाहरी होते हुए भी पिछली बार यहां से जीत दर्ज की थी। जातिगत समीकरणों को साधने के लिए पार्टी ने दमोह को बाहरी उम्मीदवार दिया है। कांग्रेस ने इस सीट से स्थानीय प्रताप सिंह लोधी को टिकट दिया है।

6. खंडवा :
इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार अरुण यादव बाहरी हैं। वे खरगोन जिले से आते हैं। इससे पहले भी अरुण यादव इस सीट से सांसद रह चुके हैं।

खरगौन सीट आरक्षित है इसलिए अरुण यादव ने खंडवा को अपना चुनावी क्षेत्र बनाया है। भाजपा के मौजूदा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान इसी सीट से आते हैं वे पहले भी लगातार यहां से सांसद चुने गए हैं।

7. देवास :
मालवा की इस आरक्षित सीट पर कांग्रेस ने जीत की संभावना के आधार पर बाहरी उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस उम्मीदवार लोक गायक पद्मश्री प्रहलाद टिपाणिया उज्जैन जिले से आते हैं। वहीं भाजपा ने यहां से महेंद्र सोलंकी को उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी स्थानीय उम्मीदवार हैं। इस सीट पर लोक गायक टिपाणिया और जज की कुर्सी छोड़कर जनता की अदालत में गए सोलंकी ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।