
The treasure wall of madhya pradesh
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में न केवल प्राकृतिक की खूबसूरती छूपी हुई है, बल्कि यहां का इतिहास भी अनेक रोमांचक कहानियां The treasure wall अपने साथ समेटा हुआ है। यहां बने पूराने महल या कोठियां भी कई रहस्य अपने अंदर ही छुपाए हुए हैं।
दरअसल जानकारों के अनुसार मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर प्राकृतिक की खूबसूरती के लिए भी पहचानी जाती है। जितना खूबसूरत यहां का इतिहास है,यहां की इमारतें भी उतनी ही कहानियों को समेटे हुए हैं।
कई रोचक किस्से भोपाल को एक महत्वपूर्ण स्थान The treasure wall का दर्जा दिलाने के लिए काफी है,यहां तक की भोपाल के एक महल को यहां की एक रानी ने पानी में तक डूबाने का किस्सा प्रसिद्ध है। कहा जाता है इसी के चलते दो तालाबों में तक बंटवारा हो गया।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के संबंध में एक बात तो हर कोई मानता है कि यहां न सिर्फ महल और भव्य भवन, The treasure wall बल्कि हर छोटे-बड़े प्राचीन निर्माण की अलग ही खासियत है। जिनमें से कुछ जाने पहचाने हैं तो कुछ काफी हद तक आज भी अनजाने बने हुए हैं।
दरअसल यहां सांस्कृतिक धरोहरों व स्थापत्य कला का बेजोड़ मुकाम आसानी से देखने को मिल जाता है। इसके साथ ही कई भवनों,दीवारों The treasure wall या अन्य जगहों की अनेक रहस्यमय कहानियां भी प्रचलित हैं।
रोज यहां के रास्तों से हजारों लाखों लोग गुजरते हैं, उन्हें इस दौरान दिखने वाली कई इमारतों,भवनों व अन्य स्थान ऐसे भी दिखतें हैं जो एक खास विशेषता लिए हुए हैं।
here is treasure wall : यहां है दीवार
वीआईपी रोड पर राजा भोज की प्रतिमा के पास एक लाल रंग की दीवार है। यह खजाने की दीवार treasure wall मानी जाती है। इसका स्थापत्य गौहर महल के समकालीन है। लेकिन इस खजाने वाले भवन के भीतर जाने का राज आज तक सामने नहीं आया।
कुछ जानकारों के अनुसार इस दीवार को The treasure wall खजाने वाली दीवार इसलिए कहा जाता है, क्योंकि पुराने समय में इसी दीवार के पास से भोपाल के शासकों का खजाना जमा किया जाता था।
यह दीवार काफी हद तक पानी में डूबी हुई है। इसके अलावा शहर के कई लोगों का मानना है कि इस दीवार के पीछे अरबों का खजाना treasure छिपा है, जो कभी यहां के शासकों का हुआ करता था।
यह जगहें भी हैं खास:
नूर महल : शाहजहां बेगम 1872-1901 के शौहर सिद्दीक हसन खान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े थे। वे अक्सर अंग्रेजों के खिलाफ लिखा करते थे।
जिससे अंग्रेज उनसे नाराज थे और बेगम पर तलाक लेने का दबाव बना रहे थे। तब बेगम ने उनके लिए अलग नूर महल बनवाया। वे ताजमहल में रहती थीं। उनसे मिलने के लिए वे तीन डिब्बों की गाड़ी से आती थीं।
लैला बुर्ज : कमलापति महल के सामने लाल रंग का बुर्ज। इस पर लैला तोप रखी जाती थी। इसी के चलते इसका नाम लैला बुर्ज पड़ गया। यह गौंड शासनकाल के किले की दीवार का एक हिस्सा है। इसका निर्माण 17-18वीं सदी में हुआ था।
गढ़ी मस्जिद और सती स्तंभ : खानूगांव में गढ़ी की मस्जिद है। यहां गौंडकाल के स्थापत्य के अवशेष देखे जा सकते हैं। ऐसी गढ़ियां किले के चारों तरफ सुरक्षा के लिए बनाई जाती थीं। यहां कई सती स्तंभ भी हैं। जहां पति की मृत्यु के बाद पत्नी भी सती होती थी उन्हीं की याद में ये स्तंभ बनाए जाते थे।
Updated on:
28 Jan 2020 05:28 pm
Published on:
28 Jan 2020 05:17 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
