
भोपाल. निजी स्कूलों और बुक सेलरों की साठगांठ की जानकारी शासन से लेकर प्रशासन तक सभी को है। लेकिन स्कूलों पर कार्रवाई के नाम पर सभी अपने हाथ पीछे खींचने लगते हैं। यही कारण है कि अभी तक एक भी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी हर साल शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी, कह कर मामले को टरका देते हैं। जब अभिभावक किताबें खरीद लेते हैं, तब बैठक कर स्कूल और किबात विक्रेताओं को सख्त चेवानी दी जाती है कि एेसा नहीं चलेगा। वहीं अभिभावक भी बच्चों के भविष्य और स्कूल, किताब विके्रताओं के रसूख के आगे बौना महसूस करते हैं। इस गोरखधंधे की आड़ में किताब विक्रेताओं ने टैक्स चोरी का एक नया रास्ता निकाल लिया है। इसके चलते वे अभिभावकों को बिल तक नहीं देते।
अभिभावकों का कहना है कि एमपी नगर के बुक्स एंड बुक्स से किताबें खरीदने पर भी पक्के बिल नहीं दिए जा रहे हैं। इसके लिए डेविट कार्ड से भुगतान करने पर भी स्वेप मशीन से निकलने वाली बैंक स्लिप में दूसरी बुक डिपो का नाम आ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस मामले में डिपो संचालक सीधे तौर पर टैक्स चोरी कर रहे हैं। यदि वे पक्का बिल देंगे और सीधे उनके खाते में पैसा जाएगा तो इससे उनकी इनकम दिखाई देगी।
पब्लिशर भी बदले
अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को सीनियर छात्र की पुरानी किताबें भी लेकर नहीं दे सकते। स्कूल यहां भी चालाकी दिखाते हैं। कोर्स में पढ़ाई जाने वाली किताबें अलग-अलग पब्लिशर की खरीदने को कहते हैं और इसे हर साल बदल भी देते हैं। ताकि बुक डिपो से ही किताबें खरीदें।
एजुकेशन सिस्टम में एक बड़ा गु्रप काम कर रह है। उनके पास हर जिम्मेदारी से बचने के उपाय हैं। किताब आदि जीचों का बिल नहीं दे रहे हैं तो सीधी सी बात है कि उनकी योजना इनकम टैक्स बचाने की है। शासन चाहे तो इस मामले में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
राजेश कुमार जैन, सीए
किताब महंगी हैं। अब बिल भी नहीं दे रहे हैं। बुक्स एंड बुक्स से किताब खरीदते हैं तो बैंक स्लिप प्रियंक बुक डिपों की निकलती है। तमाम शिकायतों के बाद भी एक भी स्कूल बुक सेलरों पर कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए अभिभावक परेशान हो रहे हैं।
नितिन गुप्ता, संचालक जागो अभिभावक जागो ग्रुप
Published on:
31 Mar 2018 02:12 pm
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