मेरठ में जन्मे कैलाश खेर को संगीत विरासत में मिला है। उनके पिता पंडिम मेहर सिंह खेर पुजारी थे और अक्सर घरों में होने वाले इवेंट में ट्रेडिशनल फोक गाया करते थे। वह एक एमेच्योर म्यूजिशियन थे। 'अल्ला के बंदे हंस दे', 'रब्बा इश्क न होवे' गीत से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने वाले कैलाश खेर ने बहुत कम समय में ही अपना मुकाम बना लिया लेकिन जब उन्हें अपने व्यवसाय में घाटा हुआ तो वो अपना जीवन समाप्त करना चाह रहे थे। खेर ने ये बात खुद एक इंटरव्यू के दौरान बताई थी।