
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले खौफ में भाजपा तो कांग्रेस का बढ़ा टेंशन! जानें इस चुनाव के रोचक फैक्ट
भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा और कांग्रेस की टेंशन बड़ गई है। जानकारों की मानें तो इन दोनों पार्टियो को चुनावों में सत्ता में आने के लिए की जा रही तमाम कोशिशें दो कारणों के चलते धाराशायी होती दिख रहीं हैं। जिसके चलते कई बड़े नेताओं तक की दिल की धड़कने लगातार तेज हो रहीं हैं।
राजनीति के जानकार डीके शर्मा के अनुसार भाजपा और कांग्रेस के बागी हुए नेता इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों की उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर नोटा भी इस बार चुनाव पर खासा असर दिखा सकता है।
जानकारी के अनुसार पिछले चुनावों में 54 सीटों पर नोटा तीसरे नंबर पर था। यानी भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा वोट नोटा को ही मिले थे। ऐसे में सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों की ही जीत मुश्किल में है।
लेकिन इसमें भी सबसे ज्यादा डर भाजपा को है, क्योंकि वर्तमान में वहीं सत्ता में है। साथ ही उसके ही बागी ज्यादा होने के साथ ही एंटी इनकंबेंसी भी उनको ही परेशान करती दिख रही है।
खास बात ये है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही काफी सोच-समझकर अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। पूरी प्लानिंग से मैदान में उतारे गए प्रत्याशियों के साथ ही कई नेता ऐसे हैं जिनका पत्ता भी कटा है।
ऐसे में कई नेता बागी बने हुए हैं और वे या तो किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो गए हैं या फिर निर्दलीय ही चुनाव लडऩे चुनावी रण में सामने आ गए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 1200 निर्दलीय प्रत्याशी इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस का गणित बिगडऩा तय माना जा रहा है।
रोचक फैक्ट जो आपको चौंका देंगे interesting facts of assembly election 2018 ...
: मध्यप्रदेश में होने वाले इस बार के विधान सभा चुनाव में 1102 प्रत्याशी मैदान में हैं।
: देश की आजादी के बाद प्रदेश में ऐसे केवल पांच चुनाव हुए थे, जिनमें निर्दलीय प्रत्याशियों का आंकड़ा हजार के पार पहुंचा था।
: वर्ष 1990 के चुनावों में रिकॉर्ड तोड़ मध्यप्रदेश की राजनीति में सबसे ज्यादा 2730 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे।
: अब निर्दलीय प्रत्याशियों के अलावा कई बड़ी-छोटी राजनीतिक पार्टियां भी मैदान में उतरने लगीं।
: जानकारों का मानना है कि यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस को जनआधार अब मजबूत नहीं हो पाता।
: ये राजनीतिक पार्टियां और निर्दलीय प्रत्याशी आंदोलन और बगावत का परिणाम हैं।
: वर्ष 2008 के चुनावों में 1090 प्रत्याशी मैदान में थे।
: वर्ष 2013 में एक दर्जन से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे थे।
: इस बार के चुनावों में भाजपा एकलौता ऐसा राजनीतिक दल है, जो प्रदेश की सभी विस सीटों से चुनाव लड़ रहा है।
: जबकि कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल चुनिंदा सीटों पर चुनावी रण में हैं।
इस बार का आंकड़ा...
- इस साल कुल 1102 प्रत्याशी मैदान में हैं।
- इनमें भाजपा सभी 230 सीटों से चुनाव लड़ रही है।
- कांग्रेस ने कुल 229 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। टीकमगढ़ की जतारा सीट कांग्रेस ने अपने गठबंधन के सहयोगी लोकतांत्रिक जनता दल के लिए छोड़ी है।
- बसपा प्रदेश की 227 सीटों से चुनाव लड़ रही है।
- आम आदमी पार्टी 208 सीटों पर प्रत्याशी उतार रही है।
- वहीं 109 सीटों के साथ सपाक्स मैदान में है।
ये भी खास...
इस बार बीस से अधिक प्रत्याशियों वाले दल भी कम नहीं हैं। इनमें शोभित समाज दल के 81, शिवसेना के 81, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी 73, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के 54, बहुजन संघर्ष दल 50,बहुजन मुक्ति पार्टी 34, जन अधिकार पार्टी 32, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के 26 तो राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के 20 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
Published on:
24 Nov 2018 03:02 pm
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