
demand for Vindhya Pradesh
भोपाल@आलोक पांड्या की रिपोर्ट...
मैहर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी की ओर से मध्य प्रदेश से अलग कर विंध्य को नया प्रदेश बनाने की उठाई गई है।
उनका कहना है कि विंध्य प्रदेश बनाने को लेकर विंध्य से भोपाल तक जन आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए वे दलगत राजनीति से उठकर सभी दलों के जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे।
त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा है कि जो लोग विंध्य क्षेत्र के बनाने के साथ है विंध्य की जनता उनके साथ है और वहीं जो साथ नहीं देगा उनका बहिष्कार किया जाएगा। इसके लिए विंध्य का एक एक मतदाता विंध्य प्रदेश को लेकर जवाब देगा।
उन्होंने आने वाले बजट सत्र में सरकार से अलग प्रदेश बनाने के प्रस्ताव को लाकर, इसे केंद्र सरकार को भेजने की मांग उठाई। अलग विंध्य प्रदेश बनाने को लेकर उन्होंने सीएम कमलनाथ और पीएम मोदी को भी पत्र लिखा है।
विंध्य के अलग राज्य की मांग केन्द्र सरकार के पास लंबित...
वहीं जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश का गठन एक नवंबर 1956 को हुआ था, उसके पहले विंध्य प्रदेश का अपना अस्तित्व था। नए प्रदेश के गठन के बाद से इसका अस्तित्व समाप्त हो गया। इसमें आने वाले बघेलखंड और बुंदेलखंड के साथ अन्य कई क्षेत्र मध्यप्रदेश का हिस्सा हो गए।
उस दौरान विलय के समय इस क्षेत्र में जो संसाधन दिए जाने थे, वह नहीं मिले।
जिसकी वजह से फिर विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन की मांग उठी, हालांकि विलय का भी व्यापक रूप से विरोध हुआ था, बड़ा आंदोलन हुआ गोलियां चली गंगा, चिंताली और अजीज नाम के लोग शहीद भी हुए, सैकड़ों लोग जेल भी गए, लेकिन सरकारी तंत्र ने उस आवाज को शांत कर दिया था।
लोकसभा में संकल्प के अध्ययन का दिया था आश्वासन
लोकसभा में मध्यप्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000 पेश किया गया था, चर्चा में भाग लेते हुए रीवा के तत्कालीन सांसद सुंदरलाल तिवारी ने मांग उठाई थी कि छत्तीसगढ़ के साथ ही विंध्यप्रदेश का भी संकल्प पारित हुआ है, इसके गठन की प्रक्रिया भी अपनाई जाए। उस दौरान गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि यदि जनभावनाओं के आधार पर प्रदेश सरकार ने संकल्प पारित कराया है तो इसका अध्ययन किया जाएगा और संभावनाओं पर विचार होगा। इसके बाद से विंध्यप्रदेश गठन की मांग का मुद्दा धीरे-धीरे कमजोर होता गया।
ऐसा था विंध्यप्रदेश...
विंध्यप्रदेश में रीवा, सीधी(सिंगरौली), सतना, शहडोल(अनूपपुर,उमरिया), पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़(निवाड़ी), दतिया आदि जिले आते थे। 1300 ग्राम पंचायतें और 11 नगर पालिकाएं थीं। विधानसभा की 60 सीटें थीं और लोकसभा की छह सीटें थी। विंध्यप्रदेश की राजधानी रीवा हुआ करती थी।
Updated on:
09 Feb 2020 12:30 pm
Published on:
09 Feb 2020 12:28 pm
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