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गौ रक्षा विधेयक के प्रावधानों पर भड़के भाजपा विधायक, बोले अलग से कानून बनाए जाने क्या जरूरत

- विधानसभा प्रवर समिति की पहली बैठक विधायकों ने दिए सुझाव, अगली बैठक सत्र के दौरान

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भोपाल। गौवंश प्रतिषेध विधेयक पर विचार करने के लिए गठित विधानसभा प्रवर समिति की पहली बैठक में भाजपा विधायकों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि जब हर प्रकार के अपराध पर पहले से कानून की धाराएं और सजा का प्रावधान है तो फिर गौ वंश प्रतिषेध में नई धाराएं क्यों जोड़ी जा रही हैं। इससे तो गौ तस्करों को कोई रोक नहीं पाएगा और वे अधिक ताकतवर हो जाएंगे।

पूर्व पशुपालन मंत्री एवं भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने कहा कि जब वे पशुपालन मंत्री थे तब वर्ष 2004 ये कानून बना था। अब सरकार इसमें नए संशोधन क्यों करना चाहती है। संशोधन के लिए मंशा भी स्पष्ट हो। उन्होंने कहा कि कानून इतना कड़ा न बना दिए जाए कि गायों की तस्करी करने वाले बेखौफ हो जाएं। क्योंकि प्रस्तावित विधेयक में गौ परिवहन करने वाले के वाहन को रोकने पर भी अपराध बनता है। इसमें सजा का प्रावधान भी है। अपराध की नई धाराएं जोडऩा समझ से परे है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सरकार पहले अपना उद्देश्य स्पष्ट करे कि वह गौ माता का संरक्षण चाहती है, या फिर गौर तस्करों की मदद कर रही है। जो लोग गौ माता को पूजते हैं तो उनको यह अधिकार भी है कि वे गौ परिवहन करने वालों से यह भी पूछें कि वे इसे कहां ले जा रहे हैं। सरकार को गौ परिवहन के नियमों में कड़े प्रावधान करना चाहिए।

इसके पहले विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने पवर समिति की प्रारंभिक बैठक पर प्रकाश डाला। कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने भी सम्बोधित किया। बैठक में विधि मंत्री पीसी शर्मा, पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव, विधायक झूमा सोलंकी सहित विधि विभाग के प्रमुख सचिव सत्येन्द्र कुमार सिंह, पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

इसलिए बनी प्रवर समिति -

विधानसभा के जुलाई माह में आयोजित सत्र के दौरान राज्य सरकार ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। सदन में भाजपा विधायकों की आपत्ति के बाद स्पीकर ने इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंपे जाने का निर्देश दिया था। इसी के तहत समिति की यह पहली बैठक थी। अगली बैठक 17 दिसम्बर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान होने की संभावना है। इस विधेयक के लिए आमजन से भी सुझाव लिए जा सकते हैं।