
श्रमिक गड्ढे की मिट्टी को कुचलते हैं, इससे हीरे के कण समझ में आ जाते हैं। इसके बाद होती है इसकी छनाई
कच्चे हीरे देश के बड़े व्यवसायियों से लेकर सिंगापुर और दुबई तक जाते हैं। तराशे जाने के बाद यही हीरे जेवरात के साथ बाजार में उतार दिए जाते हैं। दुनिया की एक बड़ी हीरा खनन कंपनी बुंदेलखंड से हीरा निकालने और उसे बेचने को लेकर घिर चुकी है।
पन्ना के हीरे पर दुनिया भर के तस्करों की नजर इसलिए है, क्योंकि उज्ज्वल किस्म का जैम क्वालिटी का हीरा पूरी दुनिया में सबसे अधिक यहीं पाया जाता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। सरकार खुद मानती है कि पन्ना की उथली खदानों से निकलने वाला 80 प्रतिशत हीरा चोरी व तस्करी हो रहा है। 2019 में तत्कालीन खनिज सचिव नरेंद्र परमार ने खुले मंच से इस बात को स्वीकार किया था। पन्ना का यह काला कारोबार अब तो खूनी खेल, अपहरण, धोखाधड़ी, विश्वासघात और संगठित अपराध की ओर पहुंच रहा है।
पांच साल पहले आया मौका गंवाया
पन्ना की खदानों से निकलने वाले हीरों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही तस्करी का खुलासा 2016 में हुआ था। तब देश की नामी फैब्रिक्स कंपनी के संचालक परिवार की बहू सिंगापुर से हीरे के जेवरात की तस्करी करते पकड़ी गई थी। डायरेक्टे्रट ऑफ रेवेन्यू इंटलीजेंस (डीआरआइ) ने बरामद दस्तावेज से पता लगाया था कि पन्ना की हीरा खदानों के कच्चे हीरे मुंबई और सूरत में बेचे गए थे, जो दुनिया के कई देशों तक पहुंचे। इन हीरों से बने जेवरात मुंबई के नौ बड़े कारोबारियों ने खरीदे थे। डीआरआइ ने जुर्माना व टैक्स की वसूली कर मामला बंद कर दिया। किसी ने हीरा तस्करी के नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश नहीं की। पुलिस और प्रशासन हीरा तस्करी, लूटपाट व अवैध खदान लगाने के दो दर्जन से अधिक मामलों में हर साल कार्रवाई करते हैं, लेकिन नेटवर्क का पता आज तक नहीं कर पाए हैं।
रहस्य बना 80 कैरेट का हीरा
अभी तक पन्ना का सबसे बड़ा हीरा 1961 में रसूल मोहम्मद का 44.55 कैरेट का अधिकारिक रूप से पाया गया था। लेकिन 2015 में सामने आई तस्करी की एक घटना में 80 कैरेट के हीरे की कहानी सात साल बाद भी रहस्य बनी हुई है। कई स्तरों पर इसकी पुष्टि होने के बाद तत्कालीन कैबिनेट मंत्री कुसुम मेहदेले ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नोटशीट लिखकर 80 कैरेट के हीरे की तस्करी का दावा करते हुए जांच कराने की मांग की थी। इस पर एफआइआर हुई, एसआइटी गठित हुई। लेकिन सरकार तस्करों और उस व्यक्ति को नहीं खोज पाई, जिसे यह हीरा मिलने की बात बताई गई थी।
ऐसे चलता है खेल
देश का इकलौता हीरा कार्यालय पन्ना में स्थापित है। लेकिन पट्टा बांटने और खुद से हीरा जमा कराने वालों की नीलामी से अधिक इसकी भूमिका नहीं है। खदानों से निकलने वाले हीरे की निगरानी के लिए कोई तंत्र नहीं है। यही वजह है कि बहुत ही कम तुआदार हीरा जमा कराते हैं। 60 फीसदी से अधिक खदाने बृजपुर और रमखिरिया जैसे हीराधारित पट्टीक्षेत्र में स्वीकृत होती हैं, लेकिन हीरे यहां से कभी कभार ही जमा होते हैं। यह तस्करी का बड़ा क्षेत्र है। इसके अलावा पांच हजार हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र हीराधारित पट्टी में शामिल है, जहां लगने वाली खदानों के हीरे तस्करी हो रहे हैं।
उथली खदान: ऐसे तलाशे जाते हैं हीरे
हीराधारित पट्टी कलेक्टर के अधीन है। इन पर उथली खदान लगाने के लिए हीरा कार्यालय लीज और अनुमति जारी करता है। महज दो सौ रुपए की फीस में कोई भी एक साल के लिए पट्टा ले सकता है। एक व्यक्ति को आठ गुणा आठ मीटर का भूखंड आवंटित किया जाता है, जिसमें 8 मीटर गहराई तक खदान लगाई जा सकती है। तुआदार खुदाई के बाद पानी से मिट्टी की मड़ाई कराते हैं ताकि वह कंकड़ को छोड़ दे। फिर उस चाल को धोते व छानते हैं और आखिरी में बड़े कणों की बिनाई करके हीरा की खोज की जाती है।
तीन तरह के हीरे
उज्ज्वल - जेम्स क्वालिटी के इस हीरे की बहुत ज्यादा मांग होती है। बाजार में इसके भाव भी ऊंचे मिलते हैं। सबसे अधिक तस्करी उज्ज्वल किस्म के हीरों की ही होती है।
मैलो - मटमैले रंग के हीरों को नाम ही मैलो रख दिया गया है। यह मध्यम दर्जे का हीरा है और बहुत अधिक तराशने के बाद ही इसका इस्तेमाल होता है।
म_ो -बाजार की भाषा में इसे हीरा का कचरा माना जाता है। बदरंग होने और दाग के कारण निम्न श्रेणी के इस हीरे के अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं।
वर्जन
हीरा की खदानों की अनुमति हीरा और माइनिंग विभाग देखते हैं। जहां अपराध का मामला होता है वहां पुलिस कार्रवाई करती है। हीरे की तस्करी से संबंधित शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती। फिलहाल हमारे पास संबंधित कोई शिकायत लंबित नहीं है।
धर्मराज मीना, एसपी पन्ना
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उथली हीरा खदानों को जारी पट्टे
वर्ष पट्टे
2017- 505
2018- 670
2019- 711
2020- 637
2021- 600
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पांच साल में हीरा उत्पादन
वर्ष हीरा संख्या वजन
2016 1133 838.05
2017 419 347.51
2018 287 308.68
2019 225 304.51
2020 145 184.73
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जिले की उथली हीरा खदानों से अब तक मिले बड़े हीरे
वर्ष वजन (कैरेट में) जिसे हीरा मिला खदान जहां से हीरा पाया गया
1961 44.55 रसूल मोहम्मद महलोन का सेहा
2018 42.59 मोतीलाल प्रजापति कृष्णा कल्याणपुर पटी
1966 40.19 मझली मुम्हारिन पन्ना महलोन का सेहा
1970 39.00 नारायण पन्ना पुखरी
1984 36.80 रहमान, देवेंद्रनगर जनकपुर
1991 34.70 मुतियां गोड़, सकरिया सकरिया
1970 29.69 तीरथ प्रसाद, चित्रकूट महुआटोल
2019 29.46 बृजेश कुमार उपाध्याय कृष्णा कल्याणपुर (पटी)
1969 28.13 पीर मोहम्मद पन्ना खिन्नी घाट
1968 26.32 रामप्रसाद कुड़ार बरम की खईया
(सभी आंकड़े हीरा कार्यालय के अनुसार)
Published on:
20 Nov 2021 11:32 pm
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