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अफसरों के पास नहीं न्यूनतम योग्यता, कैसे सुधरे सफाई और अन्य व्यवस्थाएं

- मप्र नगरपालिक निगम (अधिकारियों तथा सेवकों की नियुक्ति तथा सेवा शर्ते) नियम २००० के तहत सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के पास होना थी एमबीबीएस की डिग्री तो विधि अधिकारी होना था एलएलबी

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नगर निगम में नए बजट के लिए बैठकें शुरू

नगर निगम में नए बजट के लिए बैठकें शुरू

भोपाल. आप यकीन करेंगे कि नगर निगम के जोन में सफाई का काम देखने वाला सहायक स्वास्थ्य अधिकारी एमबीबीएस की डिग्री होल्डर होना चाहिए। विधि अधिकारी एलएलबी, उद्यान शाखा के निरीक्षक के पास कृषि, बागवानी की डिग्री होना जरूरी है। वार्ड में टैक्स की वसूली में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बजाय एलएसजीडी डिप्लोमा, कम्यूटर दक्षता वाला होना चाहिए।

शहर की सफाई से लेकर नगर निगम के जिम्मेदारी वाली अन्य व्यवस्थाएं तकनीकीतौर पर सुचारू रखने शासन ने 15 जुलाई 2015 को मप्र नगरपालिक निगम (अधिकारियों तथा सेवकों की नियुक्ति तथा सेवा शर्ते) नियम 2000 में संसोधन किए गए थे। इसमें नगर निगम के 51 पदों पर एक्सपर्ट की नियुक्ति का रास्ता खोला गया था, लेकिन चार साल बाद तक राजधानी की स्थिति ये हैं कि एक भी एक्सपर्ट नहंी है। जिसका नुकसान शहर और यहां के लोगों को कमतर सेवाओं के तौर पर भुगतना पड़ रहा है।


ऐसे समझे मौजूदा स्थिति
पद- सहायक स्वच्छता अधिकारी (एएचओ)

योग्यता- मान्यता प्राप्त विवि से एमबीबीएस
स्थिति- 19 जोन में पदस्थ एएचओ में से एक के पास भी नहीं। 70 फीसदी के पास तो सेनेटरी इंसपेक्टर का डिप्लोमा तक नहीं है। तीन एएचओ को प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी बनाया है, उनमें भी दो के पास सेनेटरी डिप्लोमा तक नहीं है।

नुकसान- शहर की सफाई व्यवस्था जोन स्तर पर बनाने का काम पूरी क्षमता के साथ नहीं। तकनीकी ज्ञान नहीं होने से उचित निर्णय नहीं ले पा रहे। शहर स्वच्छता में लगातार पीछड़ रहा।

पद- स्वच्छता निरीक्षक
योग्यता- बीएससी व स्वच्छता विषय में डिप्लोमा

स्थिति- 85 वार्ड में इनकी जरूरत है, लेकिन अभी 30 फीसदी वार्ड में है। बाकी में सफाई कामगार या दरोगा ये भूमिका निभा रहे हैं।
नुकसान- वार्ड स्तर पर स्वच्छता को सुनिश्चित करने तकनीकी ज्ञान की कमी। सफाई को लेकर सही गाइडलाइन तैयार नहीं कर पाना।


पद- परिवहन अधिकारी

योग्यता- यातायात प्रबंधन में उपाधि
स्थिति- इसे एक प्रशासनिक पद बना रखा है। उपायुक्त के भरोसे परिवहन विभाग। अभी एक सीएमओ अक्षतसिंह के भरोसे पूरा विभाग किया हुआ है।

नुकसान- परिवहन पाट्र्स की खरीदी से लेकर अन्य में घोटाले स्थिति। तकनीकी ज्ञान नहीं होने से मैकेनिक व ठेकेदार मनमर्जी से पूरा विभाग संचालित कराते हैं।


पद- राजस्व निरीक्षक
योग्तया- स्नातक व एलएसजीडी डिप्लोमा, कम्यूटर दक्षता

स्थिति- वार्ड प्रभारी इन्हें ही बनाना चाहिए, लेकिन 85 वार्ड में महज 16 ही इस श्रेणी में है। तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राजस्व निरीक्षण का जिम्मा दिया हुआ है।
दिक्कत- वसूली नहीं हो पाती। वसूली में विशेषज्ञता की कमी से निगम को आर्थिक नुकसान, जिससे शहर विकास के लिए राशि की व्यवस्था नहीं हो पाती।


पद- उद्यान निरीक्षक

योग्यता- कृषि-बागवानी में डिग्री
स्थिति- कोई भी डिग्री होल्डर नहीं है।

नुकसान- शहर की हरियाली, पार्क, सेंट्रल वर्ज का रखरखाव ठीक नहीं है। ठेकेदारों के भरोसे पूरा काम।


पद- विधि अधिकारी
योग्यता- एलएलबी

स्थिति- यहां प्रतिनियुक्ति से आए उपायुक्त को जिम्मा दिया हुआ है।
नुकसान- नगर निगम के कानूनी मामले कमजोर पड़ रहे हैं। भारी भरकम खर्च के बावजूद वह लगातार केस हार रहा है।


नोट- नगर निगम के इस तरह के 51 पदों की योग्यताएं निधारित कर नोटिफिकेशन जारी किया गया था। तत्कालीन प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन मलय श्रीवास्तव के हस्ताक्षर से ये जारी हुआ था। श्रीवास्तव का कहना है कि अब ये मौजूदा अधिकारियों को इसे सुनिश्चित कराना चाहिए। इसमें फायरमेन, अतिक्रमण अधिकारी, इंजीनियरों की योग्यताएं तय है।

नियम तो हैं और इनके अनुसार हम लगातार नई नियुक्तियां कर रहे हैं। काम निगमों में एक्सपर्ट अधिकारी भेजे हैं। इसपर हम और मंथन करेंगे।
- संजय दुबे, प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन