
World Brain Tumor Day : यहां विशेषज्ञों की भारी कमी, 20 हजार के इलाज पर 2 लाख रुपए खर्च करने की मजबूरी
भोपाल@रिपोर्ट - प्रवीण श्रीवास्तव. सरकार की लापरवाही हर महीने प्रदेशभर में दो सैकड़ा से अधिक ‘मजबूरों’ पर भारी पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में ब्रेन ट्यूमर के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था ना होने से 250 से 300 मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में इलाज के जिस बीमारी पर 20 हजार रुपए खर्च होते हैं उसी ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों में दो लाख खर्च करने पड़ रहे हैं।
इस समस्या का मूल कारण प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की भारी कमी है। इस विकराल हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेशभर में सिर्फ ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन करने के लिए महज 16 विशेषज्ञ ही हैं। जबकि यहां हर महीने दो हजार मरीज ब्रेन ट्यूमर या ट्रॉमा के होते हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश भर में मरीजों की संख्या देखते हुए 600 ऑपरेशन होना चाहिए, लेकिन 300 ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में एक ही विशेषज्ञ
प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक ही ब्रेन ट्यूमर विशेषज्ञ है। इनसे सेवा लेने की जगह प्रशासनिक कार्य कराया जा रहा है। प्रदेश के 51 जिला अस्पतालों में एक भी ब्रेन ट्यूमर विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में यहां आने वाले मरीज भी मेडिकल कॉलेज जाते हैं।
किस मेडिकल कॉलेज में कितने ब्रेन ट्यूमर सर्जन, ओपीडी में मरीज संख्या
कॉलेज - चिकित्सक - ओपीडी
भोपाल - 03 - 10-12
इंदौर - 02 - 10-12
ग्वालियर - 06 - 20-25
जबलपुर - 04 - 20-25
रीवा - 01 - 04-05
मप्र में ट्रॉमा की स्थिति
वर्ष - हादसे - मौत
2017 - 54785 - 9854
2016 - 53972 - 9646
2015 - 54947 - 9314
2014 - 53472 - 8569
2013 - 51810 - 8588
जो हैं वो भी नहीं कर पा रहे
पहले से ही विशेषज्ञों की कमी झेल रहा विभाग मौजूदा विशेषज्ञों से भी काम नहीं ले पा रहा है। दरअसल प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेज में से ग्वालियर और जबलपुर में ही ब्रेन सर्जरी विभाग है। बाकी जगह अलग विभाग ना होने से विशेषज्ञों को सामान्य सर्जरी विभाग के अंडर में काम करना होता है। ऐसे में तीन मेडिकल कॉलेज में मौजूद विशेषज्ञ ट्रॉमा या जनरल सर्जरी ही करने को मजबूर हैं।
लगातार बढ़ रहे ट्रॉमा के मामले
प्रदेश में दुर्घटनाओं के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। 2013 में 8588 लोगों की मौत दुर्घटना में हुई थी, वहीं 2017 में यह संख्या बढकऱ 9854 हो गई। गांधी मेडिकल कॉलेज के ब्रेन ट्यूमर विशेषज्ञ डॉ. एके चौरसिया बताते हैं कि वाहनों के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इसलिए जरूरी है कि मेडिकल कॉलेजों में ट्रॉमा के साथ ब्रेन सर्जरी के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाए।
Published on:
08 Jun 2018 08:32 am
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